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कश्‍मीर: ‘खुदा के लिए मेरे बच्‍चे को छोड़ दो’, आतंकियों से मां की अपील, अगले दिन मिली बेटे की जली हुई लाश

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा इलाके में दो आतंकियों ने एक 12 साल के बच्चे और उसके चाचा को 9 घंटे तक बंदी बनाए रखा। अगले दिन शुक्रवार (22मार्च) आतंकियों ने 12 वर्षीय आतिफ की हत्या कर दी ।

Author Updated: March 23, 2019 2:49 PM
विलाप करतीं आतिफ मीर की मांग (फोटोः शोएब मसूद, इंडियन एक्सप्रेस)

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा इलाके में आतंकियों ने 12 साल के बच्चे को नौ घंटे तक बंदी बनाने के बाद उसकी हत्या कर दी। मृतक की पहचान आतिफ मीर के रूप में हुई। पुलिस ने बताया कि गुरुवार (21 मार्च) को आतिफ और उसके चाचा अब्दुल हमीद को आतंकियों ने बंधक बना लिया था। इसके बाद शुक्रवार (22 मार्च) को आतिफ का शव बरामद किया गया।

आतिफ की मां शरीफा जान ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि वह पूरी रात अपने बेटे की सलामती की प्रार्थना करती रही। उन्होंने कहा कि वह नहीं समझ पा रही हैं कि उनके बेटे को कोई क्यों मारेगा? वह सिर्फ 12 साल था। आपबीती सुनाते हुए शरीफा ने कहा, ‘हमने आतंकियों से अपने बेटे को रिहा करने की अपील की थी। लेकिन आतंकियों ने उसे रिहा नहीं किया। मेरे बेटे ने आखिर उनका क्या बिगाड़ा था। वह अभी बहुत छोटा था।’

मां को बेटे के सही सलामत घर लौट आने का था भरोसाः मृतक आतिफ की मां शरीफा जान ने बताया कि शुक्रवार सुबह तक उन्हें उम्मीद थी कि उनका बेटा लौट आएगा। लेकिन अब सबकुछ खत्म कर दिया और उन्हें दोपहर को उन्हें अपने बेटे की मौत की खबर मिली। आतिफ का शव तीन मंजिला घर से बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के नाम अली और हुबैब है। दोनों पाकिस्तान के मूल निवासी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने बांदीपोरा इलाके से दो नागरिकों को बंधक बना लिया था। इस दौरान आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में आतंकियों ने आतिफ की हत्या कर दी। लेकिन पुलिस आतिफ के चाचा को बचाने को सफल रही। पुलिस ने बताया कि इस मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए।

दुकान पर थे पिता जब बेटे के अगवा होने की खबर आईः हाजिन गांव के मीर मोहल्ले में रहने वाले आतिफ के पिता ने बताया कि जिस समय उनके बेटे को अगवा किया गया उस समय वह अपनी दुकान पर थे। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि आतंकियों ने सोचा हो कि उनके बेटे को बंधक बनाकर वह बच सकते थे। पुलिस सुरक्षा बलों ने उनके बेटे को छुड़ाने की बहुत कोशिश की। यहां तक की उन्होंने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में भी देरी की लेकिन आतंकियों ने उनके बेटे को नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस ने भी आतंकियों से आतिफ को छोड़ने की अपील की थी इसके बावजूद आतंकियों ने उसे नहीं छोड़ा। यही नहीं लाउड स्पीकर से भी अपील की गई थी।

इलाके में रहने वाले कुछ ग्रामीणों ने कहा कि अगर सुरक्षा बलों ने अपना ऑपरेशन पूरी तरह रद्द कर दिया होता तो शायद आतंकी आतिफ को रिहा कर देते। इलाके के एसएसपी बांदीपोरा राहुल मलिक ने कहा कि मारे गए आतंकियों में से एक अली घर के मालिक की बेटी से शादी करना चाहता था लेकिन परिवार सहमत नहीं था। उन्होंने कहा, ‘आतंकियों ने नाबालिग को बदला लेने के लिए मार डाला।’

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