झारखंड सरकार का स्वास्थ्य विभाग इस वक्त चर्चा में है। राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी वरीय अस्पताल प्रबंधक (सीनियर हॉस्पिटल मैनेजर) की नियुक्ति अधिसूचना पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक, 23 को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक,चयनित 29 अभ्यर्थियों में से 28 के नाम के आगे डॉक्टर लिखा गया है। जबकि इनमें कोई भी अभ्यर्थी MBBS नहीं है, बल्कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट से जुड़े पदों पर कार्यरत हैं। ऐसे में सरकारी दस्तावेज में सभी को डॉक्टर लिखे जाने से सवाल खड़े होने लगे हैं।
अब इस मामले को लेकर जूनियर डॉक्टर नेटवर्क झारखंड ने इसे गंभीर प्रशासनिक त्रुटि माना है। साथ ही सरकार से तत्काल संशोधित अधिसूचना जारी करने का अनुरोध किया है और कहा है कि चयनित अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक की जाए।
हालांकि, यह विवाद केवल अधिसूचना तक सीमित नहीं है। जनवरी 2025 में जारी विभागीय संकल्प में वरीय अस्पताल प्रबंधक के पद के लिए MBBS अनिवार्य था। इसके साथ अस्पताल प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा अथवा एमबीए जैंसी अतिरिक्त योग्यता भी अपेक्षित थी। यानी अभ्यर्थी का पहले एमबीबीएस चिकित्सक होना जरूरी था। इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने 20 जून 2025 को भर्ती का विज्ञापन जारी किया।
विज्ञापन में बताया गया था कि नियुक्ति विभागीय संकल्प के आधार पर की जा रही है, लेकिन शैक्षणिक योग्यता के विवरण में बदलाव कर दिया गया। आरोप है कि जहां संकल्प में MBBS, पीजी डिप्लोमा/एमबीए का प्रावधान था, वहीं विज्ञापन में इसे एमबीबीएस/पीजी डिप्लोमा/एमबीए कर दिया गया। इससे यह माना जाने लगा कि इन तीनों में से किसी एक योग्यता वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं, जबकि संकल्प के आधार पर अभ्यर्थी को MBBS होना जरूरी था।
अब नियुक्ति अधिसूचना में चयनित अभ्यर्थियों के नाम के आगे डॉक्टर लिखे जाने से विवाद खड़ा हो गया है। उपलब्ध सूची के अनुसार, अधिकांश चयनित अभ्यर्थी विभिन्न सरकारी अस्पतालों में अस्पताल प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं। यदि वे चिकित्सक नहीं हैं, तो उनके नाम के साथ डॉक्टर लिखने का क्या आधार है? इस तरह के सवाल उठ रहे हैं। जबकि अधिसूचना जारी होने से पहले जब इन अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया था उनमें से किसी के नाम से पहले डाक्टर नहीं लिखा गया था।
जूनियर डॉक्टर नेटवर्क ने खड़े किए सवाल
जूनियर डॉक्टर नेटवर्क, झारखंड के अध्यक्ष डॉक्टर सुशील कुमार ने सरकार से सवाल किया कि जिन अभ्यर्थियों के नाम के आगे डॉक्टर लिखा गया है, उनकी वास्तविक शैक्षणिक योग्यता क्या है? क्या सभी चयनित अभ्यर्थियों के पास MBBS अथवा मान्यता प्राप्त चिकित्सा डिग्री है। यदि नहीं, तो सरकारी अधिसूचना में उन्हें डॉक्टर किस आधार पर लिखा गया। यदि यह टंकण या प्रशासनिक त्रुटि है, तो तत्काल संशोधित अधिसूचना जारी कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
सुशील कुमार का कहना है कि सरकारी अधिसूचना एक आधिकारिक और वैधानिक दस्तावेज है। उसमें हर शब्द का कानूनी और सामाजिक महत्व होता है। डॉक्टर जैसी पेशेवर उपाधि केवल उसी व्यक्ति के लिए प्रयोग की जानी चाहिए, जो इसके लिए विधिक रूप से पात्र हो। अन्यथा इससे चिकित्सा पेशे की गरिमा प्रभावित होती है और आम जनता में असमंजस की की स्थिति पैदा हो सकती है।
सरकार से मांगा गया स्पष्टीकरण
जूनियर डॉक्टर नेटवर्क ने मांग करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार का दावा है कि चयनित सभी अभ्यर्थी चिकित्सक हैं, तो उनकी शैक्षणिक डिग्रियों का डाटा सार्वजनिक किया जाए। वहीं, अगर नोटिफेकेशन में गलती हुई है तो उसे तत्काल सही करके वास्तविक स्थिति साफ की जाए।
हालांकि, अभी तक इस पूरे मामले पर न स्वास्थ्य विभाग की तरफ से और न ही सरकार के किसी मंत्री की तरफ से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब सभी की नजर हेल्थ विभाग के स्पष्टीकरण और संभावित संशोधित नोटिफेकेशन पर है।
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