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झारखंड: नशे में शख्‍स ने दे दी चुनौती, कुचलते हुए आगे बढ़ गए हाथी

वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि हाथियों के आने वाले झुंड को देखते हुए खक्सा के लोग हाथियों का पीछा करने के लिए खेत में इकट्ठे हुए। हालांकि, वे झुंड की आक्रामकता को देखकर भाग गए, केवल हेमब्रॉम ही बचा, वह शराब के नशे में था।

(सांकेतिक फोटो)

30 साल के एक व्यक्ति ने शराब के नशे में 18 हाथियों के एक झुंड को चुनौती दी थी, तो हाथी उस शख्स को कुचलते हुए आगे निकल गए थे। सोमवार 17 दिसंबर की रात को उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद उसके ग्रामीणों साथियों ने आंदोलन किया, जिन्होंने मुआवजे की मांग करते हुए घंटों तक रोड पर जाम लगाकर रखा। वन अधिकारियों ने कहा कि यह घटना राज्य की राजधानी रांची से लगभग 370 किमी पूर्वोत्तर में पाकुर जिले के पाकुरिया पुलिस स्टेशन की सीमा में हुई थी। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मरने वाले शख्स की पहचान खक्सा गांव निवासी जूलियस हेमब्रोम उर्फ ​​मनेल हेमब्रॉम के रूप में हुई थी। अगले दिन सुबह वन विभाग के अधिकारियों ने मरने वाले शख्स की 22 साल की पत्नी होपोनमाई मरांडी को 10,000 रुपए कैश में दिए और दोपहर तक 90,000 रुपए बैंक खाते में भेजने के लिए कहा। इसके बाद गांव वाले रोड से हटे थे और जाम खुला था।

वन विभाग के नियमों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति हाथियों के टकराव में मर जाता है तो उसके परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। पाकुरिया वन रेंजर अनिल कुमार सिंह ने कहा, “शुरुआती जांच के बाद बाकी 3 लाख रुपये मृतक के परिवार के खाते में जमा किए जाएंगे।” सिंह ने कहा कि 18 हाथियों के एक झुंड ने दुमका जिले के शिकारीपुर क्षेत्र से पाकुर में प्रवेश किया। हाथियों ने सोमवार की शाम को तल्दीह गांव में प्रवेश किया, लेकिन तल्दीह के लोगों ने धमाके छोड़ने शुरू कर दिए इससे जानवर चले गए। इसके बाद झुंड तब खक्सा गांव की तरफ चला गया।

सिंह ने बताया कि आने वाले झुंड को देखते हुए, खक्सा के लोग हाथियों का पीछा करने के लिए खेत में इकट्ठे हुए। हालांकि, वे झुंड की आक्रामकता को देखकर भाग गए, केवल हेमब्रॉम ही बचा, वह शराब के नशे में था। गांवों वालों के अनुसार, उसने हाथियों के झुंड को चुनौती दी और उनसे लड़ने की कोशिश की, लेकिन हाथियों ने उसे मार डाला। हेमब्रॉम के दो बच्चों और पत्नी हैं। उनकी पत्नी होपोनमाई ने कहा, “हेमब्रॉम परिवार के लिए कमानेवावा अकेला था। अब, मुझे नहीं पता कि मेरे दोनों बच्चों को कैसे खिलाया जाएगा। ग्रामीणों ने हेमब्रॉम परिवार के लिए प्रधान मंत्री आवास योजना (पीएमजेवाई) के तहत एक ठोस घर की मांग की है, क्योंकि वह अभी एक मिट्टी के घर में रहते हैं।

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