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अपनी ही सरकार के खिलाफ बागी हुआ भाजपा सांसद, कहा- लड़ेंगे या मरेंगे

कुर्मी समाज को झारखंड में पिछड़ी जाति का दर्जा मिला हुआ है। लेकिन समाज का दावा है कि एचएच रिसले की मानव ग्राफिक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक कुर्मियों को जन​जाति माना गया है। यह रिपोर्ट 1891-1892 को प्रकाशित की गई थी।

रविवार को रांची में कुरमी महाजुटान सम्‍मेलन मेें मौजूद सांसद रामटहल चौधरी। फोटो सोर्स- फेसबुक

गुजरात में भाजपा के लिए परेशानी का सबब बनने वाला पाटीदार (कुर्मी) समाज अब झारखंड में भी आंदोलन के लिए तैयार है। झारखंड के कुर्मी समाज की मांग है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया जाए। कु​र्मी समाज के साथ ही तेली समाज ने भी खुद को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग की है। इसी मांग को लेकर रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार(29 अप्रैल) को महाजुटान का आयोजन किया गया। इस आयोजन को कुरमी/कुर्मी/कुड़मी विकास मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया गया था। महाजुटान की अध्यक्षता भाजपा सांसद रामटहल चौधरी ने की। सांसद चौधरी ने रैली में अपनी ही सरकार के खिलाफ हुंकार भरी और कहा, संघर्ष करते हुए लड़ेंगे और मरेंगे, लेकिन अपना हक लेकर रहेंगे।

अपनी ही सरकार से करेंगे संघर्ष : महाजुटान में इकट्ठा हुई भारी भीड़ से उत्साहित सांसद रामटहल चौधरी ने कहा, आज नहीं तो कल हम आदिवासी बनकर रहेंगे। हमें राजनीति से ऊपर उठना होगा। कुर्मी समाज ने ही लड़कर अगर झारखंड प्रदेश हासिल किया है। हमने मुख्यमंत्री को 43 सांसदों और विधायकों का हस्ताक्षर किया हुआ पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा है। अब फैसला उनको करना है।’ वहीं जमशेदपुर से भाजपा के सांसद विद्युतवरण महतो ने भी रामटहल चौधरी के सुर में सुर मिलाए। सांसद महतो ने कहा कि कुर्मी अपने हक के लिए लड़ना और मरना—जानता है। झारखंड आंदोलन में सबसे ज्यादा जानें कुर्मियों ने ही दी हैं।

झारखंड का कुर्मी समाज लंबे समय से खुद को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग करता रहा है। फोटो- एक्‍सप्रेस आर्काइव

झारखंड के लुटेरों ने छीना हक : महाजुटान को संबोधित करने आए कु​र्मी समाज के बड़े नेता और पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने कहा कि अगर हमारे पिता और बाबा आदिवासी थे तो हम लोगों को पिछड़ा कैसे कहा जा रहा है? सरकारी दस्तावेजों में हम जनजाति हैं. लेकिन बाद में झारखंड गठन के समय लुटेरों ने हमारा हक छीन लिया। हम अपना हक लेकर ही रहेंगे चाहें संघर्ष कितना ही लबा क्यों न चले?

झारखंड कुर्मी विकास मोर्चा के सदस्यों ने अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग को लेकर रांची में निकाला मशाल जुलूस। फोटो – पीटीआई

ऐतिहासिक तथ्यों से मांग रहे दर्जा : बता दें कि कुर्मी समाज को फिलहाल झारखंड में पिछड़ी जाति का दर्जा मिला हुआ है। लेकिन समाज के नेताओं का दावा है कि एचएच रिसले की मानव ग्राफिक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक छोटा नागपुर और ओडिशा के रहने वाले कुर्मियों को जन​जाति माना गया है। यह रिपोर्ट 1891—1892 को ‘द ट्राइब्स एंड कॉस्ट आॅफ बेंगाल’ नामक पुस्तक में प्रकाशित की गई थी। वहीं साल 1913 में प्रकाशित भारत सरकार की अधिसूचना में कुर्मी समेत 13 जातियों को जनजाति माना गया था।

दर्जा देने के मूड में है सरकार: कुर्मियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के पक्ष में झारखंड की सरकार भी है। ये बात 3 मार्च 2016 को झारखंड विधानसभा में लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में सरकार के संसदीय कार्य और कार्मिक मंत्री सरयू राय ने कही​ थी। मंत्री सरयू राय ने कहा था कि सरकार कुर्मी समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के पक्ष में है और इस पर विचार कर रही है। सरयू राय ने कहा था कि इस संबंध में झारखंड जनजातीय कल्याण शोध संस्थान से रिसर्च करवाकर केन्द्र सरकार को अप्रूवल के लिए राज्य सरकार भेजेगी।

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