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झारखंड: भूख से महिला की मौत, सरकार का जवाब- उसके बैंक खाते में पैसा था

अधिकारियों के मुताबिक सावित्री देवी 'पैरेंकिमल हीमाटोमा' और दिमाग के भीतर रक्तस्राव से पीड़ित थीं। इसके लिए उनका इलाज रांची के राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चल रहा था। इसके अलावा उनके बैंक खाते में भी 2,375 रुपये पाए गए हैं।

Dead woman's body with focus on handतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

झारखंड सरकार ने गिरिडीह में भूख को महिला की मौत का कारण मानने से इंकार किया है। सरकार ने महिला के स्वास्थ्य और बैंक खातों के रिकॉर्ड को इसका आधार माना है। लेकिन मरने वाली महिला के परिवार का दावा है कि महिला की मौत के तीन दिन पहले से घर में खाना नहीं पकाया गया था। स्थानीय अधिकारी अभी भी पता करने में जुटे हुए हैं कि आखिर क्यों 58 साल की महिला के परिवार को राशन कार्ड नहीं बनाया गया? मंगलवार (5 जून) को मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा,”हर मौत का हमें दुख है लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले, तथ्यों की जांच करना बेहद जरूरी होता है। हम सभी बहन सावित्री देवी की मौत से दुखी हैं। लेकिन जांच रिपोर्ट ये साफ तौर पर बताती है कि उनकी मौत भूख के कारण नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक सावित्री देवी ‘पैरेंकिमल हीमाटोमा’ और दिमाग के भीतर रक्तस्राव से पीड़ित थीं। इसके लिए उनका इलाज रांची के राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में चल रहा था। इसके अलावा उनके बैंक खाते में भी 2,375 रुपये पाए गए हैं।

उनके मुताबिक, ये सभी तथ्य की जांच अतिरिक्त कलेक्टर अशोक कुमार साह के नेतृत्व में गठित टीम ने जुटाए हैं। ये टीम सावित्री देवी के गांव में सोमवार (4 जून) को पहुंचे थे। टीम को जांच में मिले तथ्य मंगलवार (5 जून) को सार्वजनिक कर दिए गए। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की टीम को मंगरगड्डी गांव में पता चला कि जांच में मिले तथ्य कहानी का सिर्फ एक हिस्सा ही बयान करते हैं। जैसे उसके खाते में पैसे थे ये बात उसकी मौत के बाद उस वक्त प्रकाश में आई जब अधिकारियों ने उसकी पासबुक अपडेट करवाई।

चैनपुर पंचायत के मुखिया, राम प्रसाद महतो कहते हैं कि,”सावित्री देवी मेरे पास दो से तीन महीने पहले आईं थीं। उस वक्त उन्होंने विधवा पेंशन की मांग की थी, जिसकी हकदार वह 2014 से थीं। मैंने जांच की और पाया कि सावित्री देवी का बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है। मैंने ये करवा दिया। चार अप्रैल को तीन महीने की विधवा पेंशन, 1800 रुपये उनके खाते में आ गई। लेकिन कभी भी उन्होंने अपनी पासबुक की जांच नहीं की। उनकी मौत के बाद जब पासबुक अपडेट की गई तब मुझे पता चला कि उनके खाते में पैसा आ चुका है।” महतो का दावा है कि सावित्री देवी के परिवार को राशन कार्ड सिर्फ इसलिए नहीं मिल सका क्योंकि उनका नाम सामाजिक-आर्थिक जा​ति जनगणना, 2011 की लिस्ट में नहीं था।

संपर्क करने पर डुमरी के ब्लॉक विकास अधिकारी राहुल देव ने कहा,”सामाजिक-आर्थिक जा​ति जनगणना प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान मिलने के लिए जरूरी है। परिवार के पास राशन कार्ड होना जरूरी था।” ब्लॉक आपूर्ति अधिकारी शीतल काशी ने कहा,”एक जनप्रतिनिधि मेरे पास आए थे कि कुछ लोगों को तत्काल राशनकार्ड की जरूरत है। मैंने उनसे कहा था कि आप आॅनलाइन फॉर्म भरकर जमा कर दीजिए। इसके बाद राशनकार्ड 24 घंटे के भीतर जारी कर दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने पलटकर कभी संपर्क नहीं किया।”

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