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झारखंड: दो साल में एक दिन भी नहीं चली विधानसभा, मिनट भर में बजट-विधेयक पास!

मानसून सत्र के भी हंगामेदार होने की आशंकाओं के मद्देनजर स्पीकर दिनेश उरांव ने पक्ष-विपक्ष के विधायकों की बैठक बुलाई थी लेकिन विपक्षी नेता इसमें शामिल नहीं हुए।

झारखंड विधान सभा के मुख्य द्वार पर हंगामा करते विपक्षी जेएमएम के विधायक। (फाइल फोटो)

झारखंड विधान सभा पिछले दो सालों से ठप पड़ा है। एक दिन भी वहां काम सुचारू ढंग से नहीं हो सका है। साल 2016 के मानसून सत्र के बाद से झारखंड विधान सभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोक चलता रहा है। आलम ऐसा रहा है कि सरकार ने मिनट भर के अंदर ही बजट पास करा लिया और कई अहम बिल भी सदन में बिना चर्चा के मिनट भर में पास कराया गया। साल 2017 में सत्ता पक्ष और विपक्ष यानी बीजेपी और जेएमएम के बीच कड़वाहट और अधिक बढ़ गई जब जेपीएससी में आरक्षण का मुद्दा गर्माया। इसके बाद कभी स्थानीयता के मुद्दे पर तो कभी सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन को लेकर सदन में हंगामा हुआ। राजनीतिक दलों के टकराव के बीच जनता से जुड़े सवाल कहीं गुम हो गए। 23 नवंबर 2016 को झारखंड विधानसभा की मर्यादा तब तार-तार हो गई थी जब सदन में कुर्सियां फेंकी गईं और विधान सभा अध्यक्ष पर पिन के गोले और स्प्रे फेंके गए। सीएनटी-एसपीटी में संशोधन विधेयक पर जेएमएम और कांग्रेस के विधायकों ने जमकर उत्पात मचाया था।

झारखंड विधान सभा का मानसून सत्र आज (सोमवार, 16 जुलाई) से शुरू हो रहा है जो 21 जुलाई तक चलेगा। यानी मात्र छह दिनों के लिए ही विधान सभा का मानसून सत्र आहूत किया गया है। इसके भी हंगामेदार होने की आशंका जताई जा रही है। इस दौरान सरकार 6 विधेयक पास कराएगी। 16 जुलाई को राज्यपाल द्वारा अनुमोदित अध्यादेशों को सदन के पटल पर रखा जाएगा जबकि 17 जुलाई को अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। 18 जुलाई को अनुपूरक बजट पर वाद-विवाद होना निश्चित किया गया है इसके अलावा प्रश्नकाल भी होंगे। इस बार विधायकों ने करीब 425 सवाल विधानसभा अध्यक्ष को भेजे हैं जिनके जवाब मंत्रियों को देने हैं।

मानसून सत्र के भी हंगामेदार होने की आशंकाओं के मद्देनजर स्पीकर दिनेश उरांव ने पक्ष-विपक्ष के विधायकों की बैठक बुलाई थी लेकिन विपक्षी नेता इसमें शामिल नहीं हुए। इससे जाहिर है कि चुनावी साल में मुख्य विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के तेवर गरम हैं। हाल के उप चुनावों में भी झारखंड मुक्ति मोर्चा की जीत से विपक्षी कुनबा गदगद है। वहीं झारखंड एनडीए टूट की कगार पर है।

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