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मोटा कर्ज लेकर चुनाव हारने वाले जेएमएम के पूर्व विधायक की हार्ट अटैक से मौत, खुद को कर लिया था घर में कैद

साल 2014 के विधान सभा चुनाव में झामुमो ने जब उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन वो हार गए।

अमूल्य सरदार झारखंड आंदोलनकारियों में से एक थे। वो लंबे समय तक झामुमो के केंद्रीय कोषाध्यक्ष भी थे।

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका विधान सभा के पूर्व विधायक अमूल्य सरदार का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वो 63 साल के थे। सरदार का निधन गुरूवार को उनके पैतृक गांव हरिणा में हुआ। बताया जा रहा है कि बुधवार की रात उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, इसके बाद सुबह परिवार के लोग सरदार को अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहे थे तभी उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। साल 2005 के विधान सभा चुनावों में सरदार ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की टिकट पर पोटका सुरक्षित सीट (अनुसूचित जनजाति) से जीत दर्ज की थी। अमूल्य सरदार झारखंड आंदोलनकारियों में से एक थे। वो लंबे समय तक झामुमो के केंद्रीय कोषाध्यक्ष भी थे।

साल 2014 के विधान सभा चुनाव में झामुमो ने जब उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन वो हार गए। कहा जा रहा है कि साल 2014 के विधान सभा चुनाव में हारने के बाद से अमूल्य सरदार ने अपने घर से निकलना छोड़ दिया था और एक तरह से खुद को घर में नजरबंद कर लिया था। पिछले 6 माह से वो अपने घर के एक ही कमरे में कैद थे।

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झामुमो नेताओं का कहना है कि अमूल्य सरदार ने निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए बड़ी रकम कर्ज पर लिया था। चुनाव हारने के बाद वो वह पैसा वापस नहीं कर पा रहे थे जिसके कारण उन्होंने खुद को घर में कैद कर लिया था। बावजूद जब उसके उपर कर्जदारों का दबाव बढ़ा था तो उसने अपने को एक कमरे में कैद कर लिया था। झामुमो नेता और पूर्व विधायक राम दास सोरेन ने बताया कि सरदार ने कुछ दिनों से अपने को घर में कैद कर लिया था लेकिन इसके पीछे क्या वजह थी इस बात की जानकारी नहीं है।

अमूल्य सरदार राजनीति में आने से पहले तंत्र मंत्र और ओझा-गुणी का काम करते थे। वो भूत भगाने का काम किया करते थे। लोगों को अंधविश्वास का डर दिखाकर उनके शरीर से भूत भगाने के लिए आसपास के इलाकों में झाड़-फूंक वाले बाबा के नाम से अमूल्य सरदार चर्चित थे। हालांकि, चुनाव जीतने के बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया था। साल 2005 का चुनाव उन्होंने जेल से ही लड़ा था और भाजपा की विधायक मेनका सरदार को हराकर जीत हासिल की थी। हालांकि, 2009 के विधान सभा चुनाव में फिर से मेनका सरदार ने अमूल्य सरदार को हरा दिया था। तत्कालीन विधान सभा में स्पीकर इंदर सिंह नामधारी के बाद अमूल्य सरदार दूसरे ऐसे नेता थे जो हमेशा पगड़ी पहने रहते थे।

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