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जज ने दिया ओपन जेल जाने का ऑर्डर तो कोर्ट में “जिरह” करने लगे लालू, दी ये दलील

लालू ने जज से कहा कि कोर्ट आने में धक्का-मुक्की होती है तो जज ने कहा- बोलिए, कहां खाली करवाना है?

चारा घोटाले में सीबीआई कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद पुलिस सुरक्षा में लालू यादव। सोर्स: पीटीआई

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू यादव चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार से 89 लाख रुपये को घोटाले के एक मामले में सजायफ्ता होने के बाद रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। चारा घोटाले से ही जुड़े दुमका के एक और मामले की सुनवाई चल रही है। इसी सिलसिले में बुधवार को लालू यादव कोर्ट में पेश हुए थे। इस दौरान लालू यादव ने जज से जल्द फैसला सुनाने और तीन साल से कम सजा सुनाने का अनुरोध किया। इस पर जज शिवपाल सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा कि वो सजा के बारे में भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं।

एनडीटीवी के मुताबिक, इससे पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी में जज ने सभी आरोपियों का नाम लेकर पुकारा तो सभी ने यस सर कहकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई मगर लालू यादव ने हाथ जोड़कर जज को प्रणाम किया। लालू यादव और जज के बीच इस दौरान रोचक बातचीत हुई। लालू ने जज से कहा कि कोर्ट आने में धक्का-मुक्की होती है तो जज ने कहा- बोलिए, कहां खाली करवाना है? आपको तो इतनी सुरक्षा दी गई है और कोर्ट परिसर में तो आपके ही कार्यकर्ता रहते हैं।

इसके बाद जज ने कहा कि हमने अपने फैसले में आपको ओपन कोर्ट में रखने की अनुशंसा राज्य सरकार से की है। वहां हर तरह की सुविधा है। जज ने कहा कि वहां आप परिवार समेत रह सकते हैं। वह जेल रांची से 150 किलोमीटर दूर हजारीबाग में है। वहां आप जैसे लोग रहेंगे तो जेल की स्थिति भी सुधर जाएगी। हम वहां गए थे, वहां की स्थिति खराब हो रही है। वहां 100 कॉटेज हैं।

इस पर लालू यादव ने कहा- हुजूर, लेकिन यह जेल तो नक्सलियों के लिए बना है। हम वहां नहीं रह सकते। आप जेल मैन्यूअल देख लीजिए। सात साल से कम सजा पाए लोग वहां नहीं रह सकते। हम लोग मास लीडर हैं। रांची जेल में ही लोगों से मिलने की थोड़ी सुविधा दिला दीजिए। ओपन जेल में हमें रखेंगे तो वहां 20,000 पुलिसकर्मी को तैनात करना पड़ जाएगा और अगर हमलोग भाग गए तो नरसंहार हो जाएगा। हुजूर हमलोगों की सुरक्षा की जिम्मेवारी भी आपकी ही है।

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