झारखंड के लवाचंपा गांव में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें यह दावा किया गया कि एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में एक दलित छात्र से जबरदस्ती टॉयलेट साफ करवाया जा रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा फैल गया और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की गई। इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की।

लेकिन जांच के बाद जो तथ्य सामने आए, वे अलग ही कहानी बताते हैं। जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) अनुराग मिन्ज ने बताया कि शुरुआती आरोप गलत पाए गए हैं। उनके अनुसार, बच्चे की जाति दलित नहीं है और यह वीडियो जानबूझकर एक व्यक्तिगत विवाद के कारण बनाया गया था। जिला शिक्षा अधीक्षक ने कहा कि यह वीडियो स्कूल के आदिवासी प्रधानाध्यापक को बदनाम करने के लिए बनाया गया था। उन्होंने बताया कि वीडियो बनाने और फैलाने वाले व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।

जांच में यह भी सामने आया कि बच्चे के माता-पिता ने शिक्षा विभाग को लिखित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को स्कूल में टॉयलेट साफ करने के लिए मजबूर नहीं किया गया था और उसे किसी ने गलत तरीके से प्रभावित किया था।

बच्चे के पिता ने बताया, “स्कूल में किसी ने हमारे बच्चे से टॉयलेट साफ करने को नहीं कहा था। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने ही उसे ब्रश दिया और साफ करने को कहा। उस दिन बच्चा घर आकर परेशान था। हमने व्हाट्सऐप पर वीडियो भी देखा था। जब हमने उससे पूछा तो उसने बताया कि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने ही उसे ऐसा करने को कहा था।”

विद्यालय प्रबंधन समिति (VPS) ने भी अपनी अलग जांच की और रिपोर्ट जिला शिक्षा अधीक्षक को सौंप दी। समिति के अध्यक्ष अयोध्या रामजी ने कहा कि जांच में स्कूल स्टाफ की कोई गलती नहीं मिली। उन्होंने बताया कि माता-पिता ने खुद आगे आकर स्थिति साफ की और कहा कि वीडियो जानबूझकर बनाया गया था।

प्रधानाध्यापक ने भी कहा कि वीडियो के समय वे स्कूल में मौजूद नहीं थे। उनका कहना है कि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति से उनका पुराना विवाद था, क्योंकि उसके बच्चे का दाखिला दस्तावेजों की कमी के कारण नहीं हो सका था। इसी रंजिश के चलते यह वीडियो बनाया गया और फैलाया गया। अभी तक इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

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दिल्ली में रोजगार की तलाश में आए एक युवक की जिंदगी महज एक हफ्ते में ही खत्म हो गई। 25 साल का राजकुमार, जो झारखंड का रहने वाला था, दिल्ली आए अभी सिर्फ सात दिन ही हुए थे। उसने हाल ही में फूड डिलीवरी कंपनी जोमैटो में काम शुरू किया था, लेकिन एक सड़क हादसे ने उसकी जिंदगी छीन ली। राजकुमार पश्चिमी दिल्ली के सागरपुर इलाके में अपने दोस्त महावीर के साथ रह रहा था। गुरुवार सुबह वह स्कूटर से महावीर से मिलने जा रहा था, दोनों रोज की तरह साथ में चाय पीने वाले थे। लेकिन यह मुलाकात कभी नहीं हो पाई। महावीर के मुताबिक, हादसे से करीब एक घंटे पहले राजकुमार का फोन आया था। उसने चाय के लिए बुलाया था। महावीर ने बताया कि करीब आधे घंटे बाद मैंने उसे फोन किया, लेकिन उसने उठाया नहीं। फिर पुलिस का फोन आया कि उसका एक्सीडेंट हो गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक