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हाईकोर्ट ने हटाया था प्रतिबंध, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का हवाला देकर झारखंड सरकार ने PFI पर फिर लगाया बैन

झारखंड सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर एक बार फिर प्रतिबंधित लगा दिया है। गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार का कहना है कि पीएफआई के खिलाफ राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के पर्याप्त साक्ष्य हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास फोटो सोर्स- फेसबुक/रघुवर दास

झारखंड सरकार ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर एक बार फिर प्रतिबंधित लगा दिया है। गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। पीएफआई झारखंड के पाकुड़, साहिबगंज और जामताड़ा में सबसे ज्यादा सक्रिय है। सरकार का कहना है कि पीएफआई के खिलाफ राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के पर्याप्त साक्ष्य हैं। इससे पहले राज्य सरकार ने 21 फरवरी 2018 को पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे झारखंड हाईकोर्ट ने तकनीकी खामियों के आधार पर निरस्त कर दिया था।

गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना : गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, विस्तृत समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि पीएफआई झारखंड के साथ-साथ पूरे राष्ट्र में विशेषकर केरल, असम, पश्चिम बंगाल, बिहार में भी हिंसा, सांप्रदायिक उन्माद के आधार पर सामाजिक विभाजन कर रही है। साथ ही, भारत विरोधी व पाकिस्तान समर्थक नारे लगवाती है। इसके अलावा पीएफआई का संबंध आईएसआईएस व जेएमबी जैसे आतंकी संगठनों के साथ पाया गया है। ऐसे में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पीएफआई की बढ़ती गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाना जरूरी है।

यह लिखा है अधिसूचना में : अपराध विधि संशोधन अधिनियम, 1988 के 14वें अधिनियम की धारा 16 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राज्य सरकार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को अधिसूचना की तिथि (12 फरवरी 2019) से अवैध घोषित करती है। इस संगठन का सदस्य बनने, इसे चंदा देने और इनकी नीतियों से संबंधित कोई भी साहित्य या वर्णिका छापने या रखने को गैरकानूनी घोषित किया जाता है।

पहले 21 फरवरी 2018 को लगा था प्रतिबंध : झारखंड सरकार ने इस संगठन को पहली बार 21 फरवरी 2018 को प्रतिबंधित किया था। इसके खिलाफ झारखंड पीएफआई के सदस्य हाइकोर्ट गए थे, जिसके बाद हाईकोर्ट ने प्रतिबंध लगाने के लिए सभी तरह की कानूनी पहलुओं का सही ढंग से पालन नहीं होने की बात कही। इसके बाद 27 अगस्त 2018 को पीएफआई से प्रतिबंध हटा दिया गया था। हालांकि कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि सरकार त्रुटियों को दूर करके पीएफआई को दोबारा प्रतिबंधित कर सकती है। या राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर सकती है।

केरल के पीएफआई से संपर्क : केरल पीएफआई के जोनल प्रेसिडेंट मौलाना कलीमुल्ला से झारखंड पीएफआई के प्रदेश सचिव अब्दुल वदूद, सचिव शमीम अख्तर, अब्दुल कबीर, प्रदेश अध्यक्ष हांजला शेख, कोषाध्यक्ष अब्दुल सलाम, पाकुड़ और जामताड़ा के प्रभारी और सदस्य हबीबुर रहमान, गुलाम रसूल, जैनुल आबेदिन आदि लगातार संपर्क में हैं। केरल में आयोजित कार्यक्रम में भी झारखंड पीएफआई के सदस्य शामिल हो चुकी हैं, जिसकी रिपोर्ट विशेष शाखा के एडीजी ने सरकार को उपलब्ध कराई थी।

दोबारा अदालत जाएंगे पीएफआई के सदस्य : सरकार द्वारा दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने पर झारखंड पीएफआई के अध्यक्ष हांजला शेख ने कहा, ‘‘राज्य सरकार पहले भी पीएफआई को बैन कर चुकी है। हाईकोर्ट ने हमारे संगठन को प्रतिबंध से मुक्त किया था। अब सरकार के इस नए आदेश के खिलाफ हम दोबारा अदालत की शरण में जाएंगे।’’

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