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देवघर के ‘गुमास्ता’ परिवारों पर कोरोना की दोतरफा मारः बेरोजगारी, भुखमरी के बीच ढूंढने गए काम, तो मलबे के नीचे दबने के बाद 2 लोग गंवा बैठे जान

मौजूदा समय में कोरोना से यजमान श्रद्धालुओं के आने की संख्या नगण्य हो गई है। अब तो सावन में सरकार और पंडा समाज ने मिलकर मंदिर ही बंद कर दिया। सावन मोटी कमाई का महीना है, लेकिन कोरोना ने इस बार सूखे जैसे हालात पैदा कर दिए।

इसी होटल के एक हिस्से को गिराने के दौरान मलबे में दबने के बाद 2 मजदूरों की मौतें हुई (फोटो-1)। देवघर के बेला गांव के बाशिंदे और बाबा मंदिर के गुमास्ते (फोटो-2)। (तस्वीरें- जनसत्ता ऑनलाइन)

COVID-19 के कारण बाबा वैद्यनाथ मंदिर, देवघर में काम करने वाले गुमास्ता (पंडाजी के मातहत काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर) परिवारों के सामने बेरोजगारी और भुखमरी संकट पनप गया है। दुधमुंहे बच्चों की भूख मिटाने सड़कों पर मजदूरी मांगने निकले इन लोगों को रोज काम भी नहीं मिल पा रहा। दो वक्त की रोटी जुटाने को काम मिला तो दो गुमास्ते की मजदूरी करते शनिवार (25 जुलाई) को जान चली गई। पवन और दिनेश की राजकमल होटल के मलबे में दबकर मौत हो गई, जबकि दो अन्य मजदूर जख्मी हुए। ये बातें प्रमोद गोस्वामी ने बताईं, जो इन दोनों के साथ वहां मजदूरी कर रहा था।

इन गुमास्तों की आबादी बेला और मैथी गांव में है, जहां 200 परिवार एक अरसे से बसे हैं। ये सब बाबा धाम पर आश्रित है। गांव देवघर के कुंडा थाना क्षेत्र के तहत आता है। बेला गांव के हाकिम गोस्वामी ने बताया, मंदिर का परंपरागत काम छोड़ दूसरा काम करने का वैसा हुनर भी नहीं है, लिहाजा होटल मालिक की लापरवाही से दोनों की मौत हुई।

दरअसल, होटल मालिक ने नगर निगम से होटल के हिस्से को तोड़ने की इजाजत नहीं ली थी। इसी सिलसिले में देवघर नगर थाना में 359/20 एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें होटल मालिक रामचन्द्र प्रसाद समेत आधा दर्जन लोग नामजद हैं। सरकार से इनके परिवार को मुआवजा की मांग राजद के प्रदेश महासचिव संजय भारद्वाज ने की है। और निष्पक्ष जांच करा कर मृतक परिवार को इंसाफ दिलाने को प्रशासन से अनुरोध किया है। लोजपा भी इन दिहाड़ी मजदूरों के पक्ष में खड़ी हुई है।

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गांव के प्रमोद ने बताया कि काम के इंतजार में घंटाघर चौक के नजदीक खड़े रहते हैं, पर काम नहीं मिलता। खाली हाथ लौटना पड़ता है। कोरोना की ये दो तरफा मार है। बीमारी के साथ भुखमरी। यह दुखभरी दास्तां झारखंड के देवघर शहर से 10 किमी दूर बेला और मैथी गांव की है।

जनसत्ता संवाददाता ने इनके गांव जाकर हाल जानने की कोशिश की, जहां इनके परिवार की रोजी-रोटी का जरिया विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योर्तिर्लिंग बाबा वैद्यनाथ मंदिर है। मिथिलेश गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में यहां के पुरुष सदस्य गुमास्ता का काम करते हैं। महिलाएं फूल- बेलपत्र वगैरह बेचती हैं।

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ग्रामीण बालदेव के मुताबिक, गुमास्ता का मतलब पंडाजी के मातहत काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर। पंडाजी मंदिर में पूजा-अर्चना करने आने वाले अपने यजमानों का संकल्प करा इन्हीं गुमास्तों के हवाले कर बाबा का दर्शन कराने गर्भगृह भेजते हैं। फूल-बेलपत्र का बंदोबस्त करते हैं। बाबा और माता पार्वती का गठजोड़ा कराने मंदिर गुम्बद पर चढ़ाते हैं। यजमान खुश भक्ति के तौर पर 50-100 रुपए दे देते हैं। पंडाजी भी अपनी आमदनी में से कुछ दे देते हैं। ऐसे में घर परिवार बाबा की कृपा से चल जाता है।

मौजूदा समय में कोरोना से यजमान श्रद्धालुओं के आने की संख्या नगण्य हो गई है। अब तो सावन में सरकार और पंडा समाज ने मिलकर मंदिर ही बंद कर दिया। सावन मोटी कमाई का महीना है, लेकिन कोरोना ने इस बार सूखे जैसे हालात पैदा कर दिए। ये बात कहते हुए मृतक दिनेश के भाई राजेश गोस्वामी बोले- आखिर पेट तो बस में नहीं है। बच्चों की भूख से बिगड़ती हालत देख सड़कों पर मजदूरी करने निकलना मजबूरी है, मगर काम नहीं मिलता।

राजेश ने आगे कहा- 10 दिन से स्टेशन रोड स्थित राजकमल होटल के एक हिस्से को गिराने में गांव के 10 मजदूर लगे थे। जेसीबी मशीन भी लगाई गई थी। शनिवार को हमारे परिवार के दो लोग काल के गाल में समा गए। भगदड़ मची। हमारी दस दिन की मजदूरी भी फंस गई।

गांव मैथी में प्राथमिक विद्यालय है। स्कूल कोरोना के चलते बंद है। गांव के बच्चों को इसी वजह से मिड डे मील भी नहीं मिली। राशन कार्ड पर राशन मिलने की बात नुनु गोस्वामी जरूर बताते हैं। उन्होंने कहा- जब कमाई का जरिया ही बंद है तो अनाज भी कहां से लाएं? कोरोना से लाकडाउन एक-दो-तीन के दौरान भी किसी ने भोजन तक की मदद नहीं की। और न ही अब। लगता है प्रशासन की नजर इस गरीब गांव पर है ही नहीं। यह सवाल राजकिशोर उलट कर इस संवाददाता से ही पूछते है। वाकई ग्रामीणों की हालत खराब है।

देवघर डीएवी स्कूल के बगल में रहने वालीं 85 वर्षीय गीता देवी ने बताया कि 27 जुलाई को सावन का चौथा सोमवार था। सुलतानगंज से देवघर का रास्ता वीरान रहा। सन्नाटा पसरा मिला। गंगा घाटों, शिवगंगा और बाबा मंदिर पर पुलिस का पहरा दिखा। बाजार में सन्नाटा था। ऐसा फीका नजारा सावन में कभी नहीं देखा गया।

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