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कोरोना राष्ट्रीय समस्या है और केंद्र ने राज्यों को खुद से जूझने छोड़ दिया है और खुली छूट भी नहीं दे रहा- सीएम हेमंत सोरेन

झारखंड सीएम ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा, "केंद्र ने प्रबंधन से जुड़े लगभग हर अहम मुद्दे का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया, लेकिन हमें जरूरत की कोई भी चीज नहीं मिली, चाहे वैक्सीन हो या दवाएं।"

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र जमशेदपुर | Updated: May 23, 2021 10:56 AM
झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने कोरोना की दूसरी लहर में कुप्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डाल दी। (एक्सप्रेस फोटो- प्रवीण खन्ना)

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोरोना महामारी की तैयारियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केंद्र न तो कोरोना को राष्ट्रव्यापी समस्या समझ रहा है और न ही राज्यों की मांगों को सुनकर उन्हें स्थिति से अपने हिसाब से निपटने की छूट दे रहा है।

द संडे एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में सोरेन ने रांची स्थित अपने आवास से कहा, “यह एक राष्ट्रीय महामारी है या कोई राज्य-केंद्रित समस्या? केंद्र ने स्थिति संभालने की जिम्मेदारी न तो हमें दी और न ही खुद ठीक से संभाली। हम दवाओं का आयात नहीं कर सकते, क्योंकि केंद्र से इजाजत नहीं मिली, लेकिन केंद्र खुद किसी तरह आयात प्रबंधन करता है, जैसे वह चाहता है।”

सोरेन ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “केंद्र ने प्रबंधन से जुड़े लगभग हर अहम मुद्दे का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया। फिर चाहे वो ऑक्सीजन का आवंटन हो, मेडिकल इक्विपमेंट का आवंटन हो या वैक्सीन का।” सोरेन ने कहा कि इसके बावजूद उन्हें जरूरत की चीजें फिर भी नहीं मिली हैं। फिर चाहे वह वैक्सीन हों या दवाएं।

‘वैक्सीन खरीदने पर हमारा दिवाला निकल जाएगा’: झारखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को अपने लोगों के टीकाकरण के लिए 3.5 करोड़ से 4 करोड़ डोजों की जरूरत थी। लेकिन हमें अब तक 40 लाख डोज मिली हैं। बृहनमुंबई महानगरपालिका, जो कि एक निकाय है, वह भी मुंबई के लोगों को टीका देने के लिए वैश्विक टेंडर निकाल रही है। यह बड़ा बजट है। लेकिन झारखंड ऐसा नहीं कर सकता।

सोरेन ने कहा, “हमारा तो वैक्सीन खरीदने में दिवाला निकल जाएगा। राज्यों को इस वक्त वैक्सीन के लिए भी अपने ऊपर छोड़ दिया गया है। हम इसका प्रबंधन कैसे करेंगे। आखिर क्यों केंद्र सरकार झारखंड की तुलना महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कर रही है। हमारा बजट काफी कम है।”

मोदी पर किए ट्वीट पर बोले- ‘हम किसी से लड़ाई नहीं मोल लेना चाहते’: बता दें कि इस महीने की शुरुआत में ही सोरेन ने पीएम को लेकर एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने कहा था कि पीएम ने उनसे चर्चा में कुछ सुना नहीं, बल्कि सिर्फ बोलते रहे। इस पर जब उनसे सवाल पूछा गया तो सोरेन ने कहा कि मोदी उस शाम को कुछ देर बोले और जैसे ही उनकी बातचीत खत्म हुई, इस पूरी चर्चा को टेलिविजन पर उतार दिया गया। यह राजनीति से भी ज्यादा था, जैसे उन्होंने मुख्यमंत्रियों से बात करने की फॉर्मेलिटी पूरी की हो।

झामुमो नेता ने कहा, “आज जो स्थिति है, उसमें वे किसी से लड़ाई मोल नहीं लेना चाहते।” उन्होंने आगे कहा, “हम अलग पार्टियों से जरूर हैं या हमारी विचारधाराएं अलग हैं। लेकिन यह लड़ने का समय नहीं है। फिलहाल नाव महासागर के बीच में है। पहले इसे किनारे लगाया जाए। फिर हम लड़ लेंगे।”

‘पीएम केयर्स फंड में होनी चाहिए पारदर्शिता’: सोरेन ने कहा कि इस कोरोना लहर में सिर्फ विपक्ष को ही केंद्र सरकार से सवाल नहीं पूछना चाहिए। जो सत्ता में बैठे हैं, उन्हें भी केंद्र के कुप्रबंधन का मुद्दा उठाना चाहिए। जो सत्तासीन दल और विपक्ष का समर्थन करते हैं, उन्होंने भी जान गंवाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र को देश को यह बताना चाहिए कि पीएम केयर्स फंड के साथ क्या हुआ। पीएम केयर्स में हजारों करोड़ रुपए इकट्टआ हुए। इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्हें देश को इसका हिसाब देना चाहिए।

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