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झारखंड उपचुनाव: एनडीए में झगड़ा, साथी दल ने दोनों सीटों पर उतारे उम्‍मीदवार

झारखंड में सिल्‍ली और गोमिया विधानसभा सीट के लिए एनडीए के घटक दल आजसू ने अपने उम्‍मीदवारों को उतारने की घोषणा की है। सिल्‍ली से पार्टी अध्‍यक्ष सुदेश महतो खुद चुनाव मैदान में हैं। वहीं, पार्टी ने गोमिया से एक पूर्व नौकरशाह को प्रत्‍याशी बनाया है। ये दोनों सीटें झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास थीं, जिन्‍हें कोर्ट के फैसले के बाद अयोग्‍य करार दे दिया गया।

झारखंड में घटक दल आजसू के रवैये से भाजपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। (फाइल फोटो)

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में एनडीए में मतभेत सतह पर आ गए हैं। दरअसल, भाजपा शासित राज्‍य में दो विधानसभा सीटों सिल्‍ली और गोमिया के लिए उपचुनाव होने हैं। इससे पहले कि भाजपा की अगुआई वाली गठबंधन के घटक दल उम्‍मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने पर विचार-विमर्श कर आम राय से फैसला लेते, ऑल झारखंड स्‍टूडेंट्स यूनियन (आजसू) ने दोनों सीटों पर अपने उम्‍मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। आजसू प्रमुख सुदेश महतो खुद सिल्‍ली से चुनाव लड़ेंगे। वहीं, गोमिया से पार्टी ने प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी लंबोदर महतो को मैदान में उतारा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों प्रत्‍याशी 7 मई को पर्चा दाखिल करेंगे। आजसू प्रवकत देवशरण भगत ने इसका ऐलान किया। उन्‍होंने बताया कि सिल्‍ली और गोमिया आजसू के प्रभाव वाला क्षेत्र है। देवशरण ने कहा, ‘पिछले विधानसभा चुनावों में पार्टी ने फसल तैयार की थी, जिसे झामुमो ने काटा लिया था। इस बार फसल आजसू ने तैयार की है और वही काटेगी भी। आजसू के चुनाव लड़ने से गठबंधन और मजबूत होगा।’ मालूम हो क‍ि दोनों सीटें झामुमो के पास थीं, लेकिन कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के कारण दोनों की विधानसभा सदस्‍यता समाप्‍त कर दी गई थी। लिहाजा, उपचुनाव अनिवार्य हो गया। सिल्‍ली और गोमिया सीटों के लिए 28 मई को वोट डाले जाएंगे।

‘छोटे भाई की तरह हमेशा गठबंधन धर्म निभाया’: आजसू प्रवक्‍ता देवशरण भगत ने कहा क‍ि उनकी पार्टी ने हमेशा ही एक छोटे भाई की तरह गठबंधन धर्म निभाया। इस बार भाजपा गठबंधन धर्म का पालन करे। बता दें कि भाजपा ने सिल्‍ली सीट आजसू के लिए छोड़ दी है, जबकि गोमिया से प्रत्‍याशी उतारने की घोषणा की है। इस पर देवशरण भगत ने कहा, ‘आजसू दोनों सीटों पर अपने उम्‍मीदवार उतारी है। ऐसे में हमने भाजपा से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इस चुनाव का परिणाम गठबंधन के हित में होगा।’ वहीं, पार्टी के एक अन्‍य प्रवक्‍ता जयंत घोष ने कहा क‍ि दोनों सीटों के लिए उपचुनाव भाजपा और आजसू के बीच नहीं, बल्कि‍ एनडीए और झामुमो के बीच मुकाबला है। इसमें आजसू की स्थिति कहीं बेहतर है।

भाजपा के लिए सिरदर्द: वर्ष 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में झारखंड में सहयोगी दल का रवैया भाजपा की मुश्किलों को बढ़ा सकता है। सिल्‍ली से आजसू प्रमुख सुदेश महतो खुद मैदान में हैं। भाजपा ने इस सीट को घटक दलों के लिए छोड़ने के लिए पहले ही फैसला कर चुकी है। मामला गोमिया सीट को लेकर अटका हुआ है। भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष लक्ष्‍मण गिलुवा ने कहा, ‘आजसू ने सिल्‍ली और गोमिया सीटों के लिए अपने प्रत्‍याशी मैदान में उतारे हैं। इसक बाद आजसू से बातचीत की जा रही है। केंद्रीय नेतृत्‍व की पहल पर भाजपा और आजसू के बीच झारखंड में गठजोड़ हुआ। लिहाजा, पार्टी के शीर्ष नेता एक-दो दिनों में बैठक कर इस मुद्दे पर फैसला लेंगे।’

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