Greenfield Expressway: जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले 74.5 किलोमीटर लंबे छह लेन के ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,586 करोड़ रुपए है। हाल ही में पेश किए गए अनुपूरक बजट में इसके लिए 250 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।

इस लिंक एक्सप्रेसवे के बनने से पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से की जेवर हवाई अड्डे तक पहुंच आसान हो जाएगी। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड से आने वाले यात्रियों को भी हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।

संपर्क का बढ़ेगा दायरा

इससे हवाई अड्डे के संपर्क का दायरा बढ़ेगा और यात्री समेत हवाई कार्गो की संख्या में वृद्धि की संभावना है। यह परियोजना लाजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, होटल, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा देगी। जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने इस मंजूरी के लिए सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया से जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण आर्थिक गलियारा साबित होगा। उन्होंने विकास परियोजनाओं के लिए अपनी भूमि देने वाले किसानों के योगदान को भी सराहा।

नोएडा प्राधिकरण ने तैयार किया मसौदा

किसानों के आबादी भूखंडों को लेकर लंबे समय से अटके मसले का नोएडा प्राधिकरण ने पूर्ण समाधान करने का मसौदा तैयार किया है। जिसके तहत दीपावली तक किसानों के लंबित पांच फीसद आबादी भूखंडों को आबंटित किया जाएगा। करीब 350 से अधिक पात्र किसानों के लिए सेक्टर-146 आदि इलाके में जमीन की पहचान कर ली है।

साथ ही मनमर्जी की जगह छांटने को लेकर होने वाले विवाद से बचने के लिए इस बार आबंटन प्रक्रिया ड्रा के जरिए कराई जाएगी। ड्रा से यह तय होगा कि किसान को कौन सा भूखंड मिलेगा। ड्रा की पर्ची के आधार पर ही उसे कार्नर, पार्क के सामने या 12 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर भूखंड दिए जाने का निर्धारण होगा।

प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक प्रत्येक किसान के मामले में अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने से ज्यादा समय बर्बाद होता है, इसलिए सभी पात्र किसानों की एक संयुक्त सूची तैयार की गई है। जिसके जरिए सभी मामलों को एक साथ निपटाया जा रहा है, ताकि सालों से अटकी यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सके।

निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था का दावा

प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी क्रांति शेखर ने बताया कि पांच फीसद श्रेणी के बचे हुए भूखंडों के आबंटन का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है। प्रयास है कि दीपावली से पहले सभी 350 से अधिक किसानों को उनके भूखंड सौंप दिए जाएं। निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था के तहत स्थान का निर्धारण ड्रा के जरिए कराने का निर्णय लिया गया है।

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