बिहार के सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने की चर्चाओं और उससे पैदा हुई सियासी हलचलों ने जदयू कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भावनाओं का सैलाब ला दिया है। जैसे ही यह खबर फैली कि उनके नेता राज्यसभा जा सकते हैं, कई कार्यकर्ता बच्चों की तरह रोने-बिलखने लगे। उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था कि वे इस घटनाक्रम से बेहद दुखी और बेचैन हैं। कई समर्थक कह रहे हैं कि उन्होंने अपने नेता को हमेशा बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में ही देखा है और आगे भी उसी रूप में देखना चाहते हैं।
बुधवार रात से ही पटना में मुख्यमंत्री आवास और जदयू कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता इकट्ठा होने लगे। कोई हाथ जोड़कर अपने नेता से बिहार न छोड़ने की अपील कर रहा था, तो कोई रोते हुए गुहार लगा रहा था कि वे राज्यसभा न जाएं। वहां का माहौल ऐसा था मानो किसी अपने के दूर जाने की खबर ने सभी को भीतर तक हिला दिया हो। समर्थकों की आंखों में आंसू और आवाज में भावनाएं साफ बता रही थीं कि उनके लिए यह सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा मामला बन गया है।
मीडिया के सामने अपनी भावनाएं नहीं रोक पाए कार्यकर्ता
कई कार्यकर्ता मीडिया के सामने अपनी भावनाएं रोक नहीं पाए। एक कार्यकर्ता की आंखों में आंसू थे। उसने कहा, “नीतीश कुमार ने हमेशा जनता के लिए काम किया है। ऐसा कोई समाज नहीं है जिसके लिए उन्होंने योजना न बनाई हो। हम उन्हें बिहार से जाने नहीं देंगे।”
कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव के समय जनता ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में ही अपना समर्थन दिया था। ऐसे में अगर वह राज्यसभा चले जाते हैं तो यह जनता की उम्मीदों के साथ न्याय नहीं होगा। एक समर्थक ने कहा, “हमने चुनाव में बहुत संघर्ष किया है। विरोध झेला, लाठियां खाईं, तब जाकर सरकार बनी। अब हम कैसे अपने नेता को बिहार से जाने दें?”

कई कार्यकर्ता यह भी कह रहे हैं कि बिहार की जनता नीतीश कुमार को सिर्फ एक नेता नहीं बल्कि परिवार के सदस्य की तरह मानती है। एक समर्थक ने भावुक होकर कहा, “छात्र आंदोलन से लेकर आज तक उन्होंने बिहार की सेवा की है। यहां उनके अलावा कोई दूसरा मुख्यमंत्री हम स्वीकार नहीं कर पाएंगे।”
विरोध कर रहे कुछ कार्यकर्ताओं ने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन भी करेंगे। एक कार्यकर्ता ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर यह फैसला बदला नहीं गया तो हम सड़क जाम करेंगे और धरने पर बैठेंगे।”
कुछ पुराने कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि वे 20–25 साल से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें सच्चाई जानने का हक है। उनका कहना है कि सुबह से वे आवास के बाहर खड़े हैं, लेकिन अभी तक किसी नेता ने आकर साफ नहीं बताया कि यह फैसला सच में लिया गया है या नहीं।
इधर विपक्ष के कुछ नेताओं ने भी इस चर्चा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसा होता है तो इससे जदयू कमजोर हो सकती है और बिहार की राजनीति पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल सच्चाई क्या है, यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन इतना जरूर है कि इस चर्चा ने जदयू के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाओं को गहराई से छू लिया है। उनके लिए नीतीश कुमार सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि भरोसे और उम्मीद का चेहरा हैं — और शायद यही वजह है कि वे उन्हें बिहार से दूर जाते देखने को तैयार नहीं हैं।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्यसभा जाएंगे। उन्होंने X पर एक पोस्ट कर कहा कि वह राज्यसभा का सदस्य बनना चाहते हैं। नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में जो भी नई सरकार बनेगी, उसका उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
