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..तो क्या ममता बनर्जी के खिलाफ बयान देने के चलते जेडीयू नेता अजय आलोक को छोड़ना पड़ा प्रवक्ता का पद

जेडीयू प्रवक्ता ने मंगलवार (11 जून 2019) रात को कहा यह बयान दिया था जिसके दूसरे दिन गुरुवार (13 जून 2019) को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। माना जा रहा है कि जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार उनके इस बयान की वजह से उनसे नाराज थे।

Author पटना | Updated: June 14, 2019 10:45 PM
अजय आलोक। फोटो: इंडियन एक्सप्रेस

जेडीयू नेता अजय आलोक ने पार्टी के प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ट्वीटर पर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके राजनीतिक गुरु हैं और वह उनकी ‘शर्मिंदगी’ का कारण नहीं बनना चाहते। हाल ही में आलोक ने बयान दिया था कि पश्चिम बंगाली की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को ‘मिनी पाकिस्तान’ बनाना चाहती हैं।

जेडीयू प्रवक्ता ने मंगलवार (11 जून 2019) रात को यह बयान दिया था जिसके दूसरे दिन गुरुवार (13 जून 2019) उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। माना जा रहा है कि जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार उनके इस बयान की वजह से उनसे नाराज थे।

उन्होंने कहा था कि ‘ममता बनर्जी अपने राज्‍य को ‘मिनी पाकिस्‍तान’ बना रही हैं। वहां बिहारियों को बाहर निकाला जा रहा है और हमारे लोगों को उनके राज्य से भागने के लिए मजबूर करने वाले लोग बंगाली नहीं हैं। वे रोहिंग्या हैं।’

आलोक ने कहा था कि ‘बनर्जी ने बिहार सीएम को राज्य से बाहर एनडीए के साथ गठबंधन नहीं करने के लिए धन्यवाद दिया है, लेकिन इससे उनकी गलतियां कम नहीं हो जातीं। जदयू अपने रुख पर कायम है। मालूम हो कि जेडीयू ने बीते दिनों घोषणा की है कि वह दिल्ली, झारखंड, जम्मू और कश्मीर तथा हरियाणा के विधानसभा चुनाव अपने दम पर अकेले ही लड़ेगी।’

प्रशांत किशोर पर उठाए थे सवाल: अजय आलोक ने जेडीयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर पर सवाल उठाए थे। किशोर की कंपनी ममता बनर्जी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव प्रचार की कमान संभालेगी। उन्होंने इसी पर ट्वीट कर कहा था कि ‘प्रशांत किशोर और ममता के बीच क्या बैठक हुई? क्यों हुई? क्या हुआ? हमें इसकी कोई जानकारी नहीं हैं ना ही पार्टी को इसके बारे में कुछ मालूम हैं। इस मामले पर प्रकाश स्वयं प्रशांत किशोर ही डाल सकते हैं। पार्टी का कोई लेना देना नहीं हैं।’

बहरहाल ममता के खिलाफ लगातार बयानबाजी के बाद प्रवक्ता पद से इस्तीफा इस बात की ओर इशारा करता है कि नीतीश और ममता की राजनीतिक नजदीकी लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं प्रशांत किशोर की कंपनी के ममता के लिए काम करने पर नीतीश द्वारा कोई एक्शन नहीं लेना भी इस बात की कुछ हद तक पुष्टि करता है।

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