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बिहार चुनाव के अंत में इमोशनल कार्ड: नीतीश ने दिया आखिरी चुनाव का हवाला, पीएम मोदी ने लिखा खत

नीतीश कुमार ने पहला चुनाव 1977 में लड़ा था, वह कई बार लोकसभा के सांसद रहे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रहे। 2005 में उन्होंने बिहार के सीएम का पद संभाला था।

Nitish Kumar, Narendra Modiप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में एनडीए गठबंधन के लिए 12 रैलियों में हिस्सा लिया। इनमें कई रैलियों में नीतीश कुमार उनके साथ ही रहे। (फोटो- PTI)

बिहार में तीसरे चरण के मतदान में अब सिर्फ एक दिन का समय रह गया है। इस बीच सभी नेताओं ने चुनाव प्रचार तेज कर दिए हैं। जहां ज्यादातर नेता आखिरी चरण में वादों की झड़ी लगाने से नहीं चूक रहे, वहीं भाजपा और जदयू ने अब चुनाव जीतने के लिए इमोशनल कार्ड फेंकने शुरू किए हैं। सबसे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि यह विधानसभा चुनाव उनके लिए अंतिम हैं। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार की जनता के नाम चिट्ठी लिखी है और कहा है कि उन्हें बेहतर काम करने के लिए राज्य में नीतीश कुमार की जरूरत है।

1977 में शुरू हुआ नीतीश का चुनावी सफर: पूर्णिया के धमदाहा में एक रैली को संबोधित करने के दौरान नीतीश ने कहा, “आज चुनाव प्रचार का अंतिम दिन है। परसों मतदान है और यह मेरा अंतिम चुनाव है। अंत भला तो सब भला। गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने साल 1977 में अपना पहला चुनाव लड़ा था। वह कई बार लोकसभा के सांसद रहे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रहे। नीतीश कुमार साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘जब हमें काम करने का मौका मिला, तब हमने कहा था कि न्याय के साथ विकास किया जाएगा। हमने अपना वादा पूरा किया। हमने किसी की भी उपेक्षा नहीं की, सबको साथ ले कर चले, सबका विकास किया। आगे मौका मिला तो राज्य को विकास की नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।’’ नीतीश कुमार ने कहा, ‘‘हमने तो सिर्फ काम किया है ,और मौका मिलेगा तब हर समुदाय और हर क्षेत्र के लोगों की बेहतरी के लिए काम करते रहेंगे।’’

पीएम बोले- मुझे बिहार में नीतीश कुमार की जरूरत: दूसरी तरफ पीएम मोदी ने भी बिहार चुनाव के मद्देनजर राज्य के लोगों के नाम पर चिट्ठी जारी की। अपने ट्विटर अकाउंट पर पीएम ने चिट्ठी पोस्ट की। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि कुशासन नहीं, सुशासन पर मतदान करना है। हमारा मंत्र सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्नास है। पीएम मोदी ने कहा कि मुझे नीतीश कुमार की सरकार की जरूरत है। बिहार में विकास के नाम पर मतदान हो रहा है।”

पीएम ने चिट्ठी में आगे कहा, “बिहार में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून का राज ये दोनों चीजें एनडीए की सरकार ही दे सकती है। विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने खत में कहा है, अव्यवस्था और आरजकता के वातावरण में नव-निर्माण असंभव होता है। 2005 के बाद से बिहार में माहौल भी बदला और नव-निर्माण की प्रक्रिया भी आरंभ हुई। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून का राज, ये सामाजिक और आर्थिक संपन्नता के लिए अनिवार्य है। ये दोनों एनडीए ही दे सकता है।

इमोशनल कार्ड से तीसरे चरण की 35 सीटें निशाने पर: बिहार में आखिरी चरण के चुनाव में 78 सीटें दांव पर हैं। इनमें मधेपुरा, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज की 20 सीटों पर जदयू ही लड़ रही है। इनमें 12 सीटों पर तो उसके विधायक ही हैं, जिनमें 9 लगातार दो कार्यकाल से जीत रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि नीतीश कुमार ने इन सीटों पर एंटी-इनकंबेंसी को कम करने के लिए इमोशनल कार्ड खेला है। इसके अलावा तीसरे चरण की 35 सीटों पर अति पिछड़ी और पिछड़ी जातियां असरदार हैं। नीतीश की अपील का अगर असर होता है तो भाजपा के भी कई प्रत्याशियों को फायदा होगा और एनडीए की सीटें बढ़ सकती हैं।

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