Bihar News: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अपने संगठन को नई धार देने की बड़ी कवायद शुरू कर दी है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बुधवार (8 जुलाई 2026) को 153 सदस्यीय बिहार राज्य समिति की घोषणा की।

हाल के वर्षों में गठित यह जेडीयू की सबसे बड़ी राज्य समिति है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं को जगह देने के साथ-साथ जातीय, क्षेत्रीय और लैंगिक संतुलन साधने की स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है। राजनीतिक जानकार इसे मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार के हटने के बाद संगठन को एकजुट और चुनावी तौर पर मजबूत बनाए रखने की अहम कोशिश मान रहे हैं।

नई समिति में 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव, 74 राज्य सचिव, नौ प्रवक्ता, पार्टी के 16 प्रकोष्ठों (सेल) के प्रमुख, 19 पदाधिकारी और एक कोषाध्यक्ष शामिल हैं। यह घोषणा 22 अप्रैल को जेडीयू की 24 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के तीन महीने से भी कम समय बाद की गई है। उस समय नीतीश कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और संजय कुमार झा को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए रखा गया था।

संगठन में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ चुके हैं और उनकी जगह भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने पद संभाला है। इसी दौरान जहानाबाद के पूर्व सांसद चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

पार्टी ने 12 राष्ट्रीय महासचिवों के नामों की भी घोषणा की, जिनमें मनीष कुमार वर्मा, अफाक अहमद खान, श्याम रजक, अशोक चौधरी, रामसेवक सिंह, रमेश सिंह कुशवाहा, कहकशां परवीन और मौलाना गुलाम रसूल बलियावी समेत अन्य नेता शामिल हैं।

कुल मिलाकर, जेडीयू में लगातार हो रहे संगठनात्मक बदलाव केवल आंतरिक चुनावों के बाद की औपचारिक प्रक्रिया नहीं लगते। ये बदलाव इस बात का संकेत हैं कि पार्टी नेतृत्व नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद संगठन को मजबूत और एकजुट बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

नई बिहार राज्य समिति का गठन जेडीयू की सामाजिक रणनीति को भी स्पष्ट करता है। पार्टी ने अपने पारंपरिक समर्थन आधार – ओबीसी के लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी), दलित और महिलाओं – को प्राथमिकता दी है।

153 सदस्यीय समिति में 32 महिलाएं शामिल हैं, जबकि सात मुस्लिम नेताओं को भी जगह मिली है। इनमें वरिष्ठ नेता अंजुम आरा को महासचिव बनाया गया है। समिति में कुर्मी-कोइरी और ईबीसी समुदाय के नेताओं की मजबूत मौजूदगी है। यही सामाजिक गठबंधन पिछले दो दशकों से नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू की राजनीतिक ताकत का आधार रहा है।

दो बड़े उद्देश्य

इस संगठनात्मक कवायद के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य नजर आते हैं। पहला, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना। जेडीयू का सामाजिक आधार ईबीसी, कुर्मी, कुशवाहा और सवर्ण समाज के कुछ वर्गों के व्यापक गठबंधन पर टिका है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, “बड़ा संगठन यह सुनिश्चित करता है कि हर समुदाय और क्षेत्र को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले।”

दूसरा, पार्टी के भीतर नेताओं की अपेक्षाओं का प्रबंधन करना। वरिष्ठ नेता का कहना है कि विधायक टिकट या मंत्री पद की तुलना में दावेदारों की संख्या हमेशा अधिक होती है। ऐसे में उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव जैसे संगठनात्मक पद वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने के साथ-साथ उनके पार्टी छोड़ने की आशंका भी कम करते हैं।

उन्होंने कहा कि बड़ी समिति बनने से विधानसभा चुनाव से पहले अधिक नेताओं को जिला और संगठन स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपना भी आसान होगा।

किसे क्या मिला?

12 नए उपाध्यक्षों में सिंगेश्वर विधायक रमेश ऋषिदेव, पूर्व सांसद महाबली सिंह, पूर्व मंत्री विनोद यादव, एमएलसी संजय सिंह, पूर्व मंत्री सुमित कुमार सिंह, मंजर आलम, पूर्णिया विधायक कालाधर मंडल, प्रो. प्रमिला कुमारी प्रजापति, ज्ञान चंद पटेल, मालती सिंह, किरण रंजन और परशुराम तत्व शामिल हैं।

38 महासचिवों में आरा की पूर्व विधायक मंजू देवी, अचमित ऋषिदेव, अमरेंद्र प्रताप सिंह, रणविजय कुमार, हैदर इकबाल खान, संतोष दास पान और पवन चंद्रवंशी समेत कई नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने अपने कुर्मी-कोइरी आधार को मजबूत करने के साथ-साथ प्रजापति (कुम्हार), कानू, मंडल, तत्व, पान और चौरसिया जैसे ईबीसी समुदायों को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है। अनुसूचित जाति वर्गों की भागीदारी भी पहले की तुलना में अधिक दिखाई देती है।

जेडीयू ने अपने 16 संगठनात्मक प्रकोष्ठों के प्रमुखों की भी घोषणा की है। पार्टी ने मीडिया और जनसंपर्क को विशेष महत्व देते हुए मनीष कुमार को मीडिया, आईटी एवं कम्युनिकेशन प्रकोष्ठ का प्रमुख बनाया है। उनके साथ पांच प्रभारियों की भी नियुक्ति की गई है। इसके अलावा बबलू मंडल को ईबीसी प्रकोष्ठ, नीतीश पटेल को युवा प्रकोष्ठ और शिव रानी प्रजापति को महिला प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की बेटी और राजद सांसद मीसा भारती ने केंद्र की एनडीए सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि एनडीए के पास केवल एक ही मुद्दा है और वह है लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार। मीसा भारती ने कहा कि जबकि मैंने बार-बार यही कहा कि मुद्दा बिहार के विकास का होना चाहिए था, जो बेरोजगार हैं उनके रोजगार का और बिहार में जो पलायन एक बहुत बड़ी समस्या है उसकी रोकथाम होनी चाहिए थी। लॉ एंड ऑर्डर बेहतर करना चाहिए था, लेकिन इस सब मुद्दों पर सरकार का ध्यान न होकर लालू परिवार पर है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक