ताज़ा खबर
 

जसवंत स‍िंह को अब तक नहीं खबर क‍ि गुजर गए अटल ब‍िहारी वाजपेयी

अटल जी की सरकार में मंत्री रहे जसवंत सिंह को उनकी मौत की खबर नहीं है। उन्हें जानबूझ कर यह बात नहीं बताई गई है क्योंकि वे काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। कुछ समय पहले ब्रेन हेमरेज की वजह से वे कोमा में चले गए थे।

जसवंत सिंह को अटल बिहारी वाजपेयी की मौत की खबर नहीं है। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त 2018 को निधन हो गया। 17 अगस्त को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर फैल गई। लेकिन उनके पुराने दोस्‍त और सहयोगी रहे एक शख्स को अटल जी की मौत की खबर नहीं है। उस शख्स का नाम है जसवंत सिंह। अटल जी की सरकार में विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह के बेटे और राजस्थान के बारमेर जिले के शिव से भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह ने यह जानकारी सार्वजन‍िक की है। दिवंगत पूर्व पीएम के करीबी रहे जसवंत सिंह पिछले कई महीनों से सार्वजनिक जीवन से कटे हुए हैं। उनकी तबियत भी सख्‍त खराब है जिसके कारण उन्‍हें वाजेपेयी जी के निधन के बारे में बताया नहीं गया है।

मानवेंद्र ने एनडीटीवी के लिए लिखे एक ब्लाॅग के माध्यम से इसकी वजह भी बताई है। उन्‍होंने कहा है क‍ि व‍िज्ञान के चमत्‍कार पर उन्‍हें इतना यकीन नहीं क‍ि वह अपने प‍िता को अटल जी की मौत की जानकारी देने का जोख‍िम उठाएं। जसवंत स‍िंंह काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं। कुछ समय पहले ब्रेन हेमरेज की वजह से वे कोमा में चले गए थे और तब से डॉक्टरों की निगरानी में हैं। मानवेेंद्र का कहना है क‍ि अगर उन्‍हें अटल जी की मौत की बात बताई जाए तो वह अपने दोस्‍त के न‍िधन का शोक महसूस कर सकने की स्‍थ‍ित‍ि में नहीं हैं। यह उनकी सेहत पर भारी पड़ सकता है।

मानवेंद्र सिंह ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ” वाजपेयी जी और मेरे पिता की दोस्ती 40 वर्षों से अधिक पुरानी है। मेरे पिता को अटल जी का हनुमान भी कहा जाता है। जिन्ना पर लिखे गए किताब पर विवाद के बाद मेरे पिता जी को भाजपा से निष्काषित कर दिया गया था। तब एक मात्र व्यक्ति अटल जी थे, जिनसे मेरे पिता ने अपना हाल बयां क‍िया था। अपनी बीमार स्थिति के बावजूद, वाजपेयी जी ने उनकी पीड़ा और निष्कासन के दर्द को समझा था। उन्होंने मेरे पिता जी को कुछ ऐसी बातें कही थी, जिन्हें मैं सार्वजनिक नहीं कर सकता। एक सेहत की वजह से परेशानी में थे और दूसरा किताब पढ़े ब‍िना लगाए गए बेतुके आरोप से। दोनों ने उस समय अपने दर्द को एक-दूसरे से साझा किया।”

 

बता दें कि जसवंत सिंह अटल जी के समय में भाजपा की पहली पंक्ति में बैठने वाले नेताओं में से एक थे। अटल जी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे थे। जिन्ना पर उनकी पुस्तक को लेकर विवाद होने पर उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। वर्ष 2014 में राजस्थान के बाडमेर से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया। करीब तीन साल पहले घर में गिर जाने की वजह से उनके सिर में गहरी चोट लग गई थी। इसके बाद से उनकी हालत में सुधार नहीं आया है। उनके बेटे मानवेंद्र सिंह के अनुसार, “वे अब न तो कुछ बोल पाते हैं और न ही कुछ महसूस कर पाते हैं। अटल जी के अंतिम समय की तरह ही उनकी भी हालत हो गई है।”

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App