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हिमाचल से आ रहे हैं रोज बजरी भरे एक हजार ट्रक

उत्तराखंड में अवैध खनन का कारोबार खनन माफिया, राजनेताओं और नौकरशाहों के लिए सफेद सोना साबित हो रहा है।

Author देहरादून | April 11, 2017 3:56 AM
पंक्ति में खड़े ट्रक।

सुनील दत्त पाण्डेय 

उत्तराखंड में अवैध खनन का कारोबार खनन माफिया, राजनेताओं और नौकरशाहों के लिए सफेद सोना साबित हो रहा है। इस कारोबार से ये तमाम लोग रातोंरात मालामाल हो गए। इनकी तिकड़ी के कारण उत्तराखंड की नदियों में अवैध खनन धड़ल्ले से हो रहा है। लिहाजा, राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। इस बीच, नैनीताल हाईकोर्ट के 24 मार्च को उत्तराखंड की नदियों में खनन पर पाबंदी लगाने के बाद सूबे में अवैध खनन का कारोबार और तेजी से बढ़ा जिसे राजनेताओं और नौकरशाहों का संरक्षण प्राप्त है। खनन माफिया ने अवैध खनन के कई नए तरीके ढूंढ लिए। नए तरीकों में हिमाचल प्रदेष से चोरी छिपे बजरी सप्लाई करने का करोबार धड़ल्ले से चल रहा है।

फर्जी ट्रिपशीट के जरिए खनन माफिया करोड़ों रुपए की रेत बजरी उत्तराखंड में हिमाचल प्रदेश से सप्लाई कर रहे हंै। खनन माफिया एक ट्रक की दो ट्रिपशीट तैयार करते हैं और एक ट्रिपशीट में कम माल दिखाकर कर चोरी कर रेत बजरी उत्तराखंड में अवैध रूप से सप्लाई कर करोड़ों कमा रहे हैं और राज्य सरकार राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं। देहरादून के विकास नगर क्षेत्र के एसडीएम ने देहरादून के जिलाधिकारी और वाणिज्य कर विभाग को इस मामले में रिपोर्ट भेजी है। इस वक्त एक दिन में हिमाचल प्रदेश से एक हजार से ज्यादा ट्रक रेत बजरी के सूबे में सप्लाई हो रहे हैं। नैनीताल हाईकोर्ट के उत्तराखंड की नदियों में रोक लगाने के फैसले से पहले सूबे में हिमाचल से एक दिन में पांच सौ ट्रक आते थे।
सूबे के वित्त सचिव अमित नेगी के मुताबिक फर्जी ट्रिपशीट के मार्फत हिमाचल प्रदेश से रेत बजरी के सप्लाई करने का मामला बेहद गंभीर है। वाणिज्य कर विभाग के आयुक्त को राज्य की सभी सीमाओं पर कड़ी निगाह रखने के निर्देश हैं। नैनीताल हाईकोर्ट ने चार महीने के लिए सूबे की सभी नदियों में खनन पर पूरी तरह रोक लगाई थी और पर्यावरण विषेशज्ञों की तीन सदस्य समिति को इस बारे में चार महीने के भीतर रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने को कहा था।

राज्य सरकार नैनीताल हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी। वहीं, दूसरी ओर पर्यावरण की रक्षा के लिए कार्य करने वाली संस्था मातृ सदन के संचालक स्वामी शिवानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि इससे खनन माफिया के हौंसले और ज्यादा बुलंद होंगे। उन्होंने कहा कि मातृ सदन ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पक्षकार बनने के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका पर विचार किए बिना ही राज्य सरकार की याचिका पर फैसला सुनाकर मातृ सदन के साथ न्याय नहीं किया है।
वहीं उत्तराखंड में गंगा नदी की घाटी में खनन पर पूरी तरह से केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पाबंदी लगा रखी है। इस संबंध में मंत्रालय की दो सदस्यीय टीम ने 2015-16 तथा 2017 में एक सदस्यीय टीम ने गंगा नदी में खनन बंद करने की सिफारिश की थी। मातृ सदन की शिकायत पर इस टीम ने यह भी पुष्टि की थी कि गंगा नदी में पहाड़ों से बहकर पत्थर नदी के मैदानी क्षेत्रों में नहीं आते हैं।

 

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