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उत्तर प्रदेश: सरकारी अस्पतालों में पढ़ सकेंगे निजी मेडिकल कॉलेजों के विद्यार्थी

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की भीड़ को नियंत्रित कर बेहतर इलाज सुनिश्चित कराने में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।

Author Updated: November 27, 2019 4:37 AM
उच्च शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री धर्मवीर सैनी, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश और प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से भी समन्वय मांगा है। (फोटो इंडियन एक्सप्रेस)

उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने स्व वित्त पोषित मेडिकल, आयुर्वेदिक और नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र- छात्राओं को पर्याप्त व्यवहारिक ज्ञान उपलब्ध कराने और सरकारी चिकित्सालयों में आने वाले असंख्य मरीजों को राहत देने के लिए अनूठी योजना तैयार की है। इसमें निजी व स्व वित्त पोषित मेडिकल, नर्सिंग व आयुर्वेदिक कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्र- छात्राएं प्रयोगात्मक अनुभव के लिए सरकारी चिकित्सालयों में अनिवार्य रूप से उपस्थिति दर्ज कराएंगे। दूसरी तरफ इस योजना से चिकित्सकों समेत प्रशिक्षित मेडिकल कर्मियों की दिक्कत से जूझ रहे सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी योजना पर उच्च शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री धर्मवीर सैनी, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश और प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से भी समन्वय मांगा है।

उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने हाल ही में मेरठ और सहारनपुर मंडल के विभिन्न स्व वित्त पोषित मेडिकल, आयुर्वेदिक व नर्सिंग कॉलेजों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान स्पष्ट हुआ कि इन महाविद्यालयों में आयुष मंत्रालय समेत अन्य नियामक संस्थाओं द्वारा जारी मानकों के अनुरूप मरीज इनके चिकित्सालयों में उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। इसके कारण इन कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले छात्र- छात्राओं को पर्याप्त व्यवहारिक चिकित्सकीय ज्ञान उपलब्ध नहीं हो पाता है। वहीं, इन दोनों मंडलों के विभिन्न राजकीय चिकित्सालयों में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। राजकीय चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या के अनुरूप आवश्यक चिकित्सक व चिकित्सकीय कर्मियों की कमी के चलते उचित देखभाल नहीं हो पाती है। इस विसंगति को दूर करने और निजी मेडिकल कॉलेजों के छात्र- छात्राओं को पर्याप्त व्यवहारिक चिकित्सकीय ज्ञान उपलब्ध कराने समेत सरकारी अस्पतालों के मरीजों को चिकित्सा सुविधा, दोनों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी साबित होगी।

उच्च शिक्षा विभाग मेरठ और सहारनपुर मंडल के अधिकारियों ने निजी कॉलेजों व राजकीय चिकित्सालय की परिस्थिति के दृष्टिगत सभी स्व वित्त पोषित मेडिकल, आयुर्वेदिक व नर्सिंग कॉलेज में अध्ययनरत छात्र- छात्राओं की अनिवार्य रूप से सप्ताह में दो दिन उपस्थित होने के निर्देश जारी किए हैं। जरूरत होने पर चिकित्सा कार्य में सहयोग के लिए पाठ्यक्रम में संशोधन किया जाएगा, ताकि छात्र- छात्राओं के साथ राजकीय चिकित्सालय के मरीज भी लाभांवित हो सके। दोनों मंडल में बागपत, गौतम बुद्ध नगर, मेरठ, सहारनपुर, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, मुजफ्फरनगर और शामली कुल नौ जिले हैं। इनमें कुल 22 मेडिकल कॉलेज, 31 पेरामेडिकल कॉलेज और 36 फिजियोथैरेपी की पढ़ाई कराने वाले संस्थान हैं। इन कॉलेजों में करीब 25 हजार छात्र- छात्राएं अध्ययनरत हैं।

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की भीड़ को नियंत्रित कर बेहतर इलाज सुनिश्चित कराने में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, अधिक मरीजों की जांच कर मिलने वाले व्यवहारिक ज्ञान छात्र- छात्राओं के लिए बेहतर चिकित्सक बनने का मार्ग प्रश्स्त करेगा। मेरठ व सहारनपुर मंडल के उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक निजी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की कम संख्या की वजह से चिकित्सा पढ़ाई करने वाले सीख नहीं पा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों की भीड़ को वहां चिकित्सक दल की कमी का खमियाजा भुगतना पड़ रहा है। दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित कर स्वस्थ्य उत्तर प्रदेश का इस योजना से सपना साकार हो सकता है। स्व वित्त पोषित कॉलेज नजदीक के राजकीय चिकित्सालय भेजे जाने वाले छात्र- छात्राओं का रोस्टर तय कर सभी की सहभागिता सुनिश्चित करेंगे।

आशीष दुबे, नोएडा

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