ताज़ा खबर
 

खाकी वर्दी के साथ ‘भिक्षा नहीं शिक्षा’ का अभियान

ऑपरेशन मुक्ति अभियान के हरिद्वार प्रभारी पुलिस उपाधीक्षक अभय प्रताप सिंह का कहना है कि इनमें से एक बच्चा भी डॉक्टर, इंजीनियर या बड़ा अफसर बनता है।

Author Updated: November 20, 2019 4:24 AM
कल तक यह बच्ची हरकी पैड़ी पर आने वाले तीर्थयात्रियों के आगे-पीछे घूमकर अपना और अपने माता-पिता का पेट पालने के लिए भीख मांगती थी।

हरिद्वार के टिवड़ी क्षेत्र की रहने वाली दस साल की बच्ची आरती का कहना है कि वह खूब पढ़ना-लिखना चाहती है और पढ़-लिखकर बड़ी अफसर बनना चाहती है, ताकि वह अपने जैसे और गरीब बच्चों को भी बड़े होकर पढ़ाए-लिखाए। आरती का कहना है कि वह नहीं चाहती कि कोई बच्चा भीख मांगने के लिए मजबूर हो। आरती के पिता रूपाराम के चेहरे पर सुखद मुस्कान है कि उत्तराखंड पुलिस ने उनके बच्चों को गोद लेकर उन्हें पढ़ाने लिखाने का जिम्मा लिया है।

हरिद्वार के गंगा तट पर स्थित रोड़ी बेलवाला क्षेत्र में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली ग्यारह साल की खुशबू का कहना है कि यह उसके लिए सपने जैसा है कि वह अच्छे साफ-सुथरे कपड़े पहनकर स्कूल जाकर पढ़ाई करने लगी है। कल तक यह बच्ची हरकी पैड़ी पर आने वाले तीर्थयात्रियों के आगे-पीछे घूमकर अपना और अपने माता-पिता का पेट पालने के लिए भीख मांगती थी हरिद्वार के पुलिस उपाधीक्षक और इस अभियान के हरिद्वार प्रभारी अभय प्रताप सिंह के इस काम की लोग प्रशंसा कर रहे हैं।

पिछले दो महीनों से उत्तराखंड पुलिस अनाथ गरीब बच्चों और भिक्षा मांग रहे बच्चों को पढ़ाती हुई और उन्हें चॉकलेट, टॉफी, बिस्कुट, कॉपी-किताबें और बस्ते बांटती हुई नजर आ रही है। दो महीने में उत्तराखंड पुलिस ने आॅपरेशन मुक्ति अभियान के तहत ‘भिक्षा नहीं शिक्षा दो’ का नारा देते हुए देहरादून और हरिद्वार से 463 बच्चों को चुना। इनमें से हरिद्वार पुलिस ने हरिद्वार जनपद में भिक्षावृत्ति कर रहे 275 बच्चों को तथा देहरादून पुलिस ने 68 बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त करा कर विभिन्न स्कूलों में दाखिला दिलवाया और उनके लिखने-पढ़ने का जिम्मा लिया। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से उत्तराखंड पुलिस इन बच्चों का भविष्य संवारने की कोशिश करेगी।

ऑपरेशन मुक्ति अभियान के हरिद्वार प्रभारी पुलिस उपाधीक्षक अभय प्रताप सिंह का कहना है कि इनमें से एक बच्चा भी डॉक्टर, इंजीनियर या बड़ा अफसर बनता है तो हम पुलिसवालों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। ये बच्चे और उनके माता-पिता शुरू में पुलिस को देखकर भयभीत हो गए थे। पुलिस ने इनके अभिभावकों को भरोसे में लिया है। पुलिस ने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से बच्चों का स्कूलों में दाखिला दिलवाया और उन्हें भिक्षा मांगने की बजाय पढ़ाई-लिखाई करने के लिए प्रेरित किया। बीएचईएल हरिद्वार के सम्मेलन केंद्र में इन बच्चों और उनके माता-पिता का समागम हुआ। उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

सुनील दत्त पांडेय

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 डॉल्फिन की आबादी को जानने की एक और कोशिश
2 कैसे लागू होगी नई शिक्षा नीति?
3 मुलायम के बर्थडे पर सपा को Good News दे सकते हैं शिवपाल यादव, अखिलेश से मिला सकते हैं हाथ, CM पद को लेकर भी दिया बड़ा बयान
जस्‍ट नाउ
X