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प्रियरंजन की रिपोर्ट : राम भरोसे चल रही डीयू की लाइब्रेरी

दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग दो दर्जन ऐसे कालेज हैं जिनमें लाइब्रेरियन के पद खाली हैं। लाइब्रेरी में काम करने वाले पीए, एसपीए व लिपिकों के पद भी भारी संख्या में खाली हैं।

Author नई दिल्ली | June 12, 2016 1:50 AM
दिल्ली विश्वविद्यालय।

दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग दो दर्जन ऐसे कालेज हैं जिनमें लाइब्रेरियन के पद खाली हैं। लाइब्रेरी में काम करने वाले पीए, एसपीए व लिपिकों के पद भी भारी संख्या में खाली हैं। सालों से इन पर स्थाई नियुक्तियां नहीं की गई हैं। जो कर्मचारी जो सेवानिवृत हो रहे हैं उनके स्थान पर एडहाक या अस्थायी रूप से कर्मचारियों को रखा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कालेजों में अधिकांश कालेज दिल्ली सरकार के हैं। इनमें वरिष्ठ कर्मचारी ही लाइब्रेरियन का काम संभाल रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली सरकार से संबद्ध आठ ऐसे कालेज हैं जिसमें लंबे समय से लाइब्रेरियन (पुस्तकालयध्यक्ष) के पदों को नहीं भरा गया है। इनमें अरबिंदो कालेज, भीमराव आंबेडकर कालेज, आचार्य नरेंद्र देव कालेज, भारती कालेज, विवेकानंद कालेज, मोती लाल नेहरू कालेज (सांध्य) और दिल्ली कालेज आॅफ आर्ट्स एण्ड कॉमर्स, हंसराज कालेज, किरोड़ीमल कालेज, जीसस एंड मेरी कालेज, लेडी इर्विन कालेज, पीजीडीएवी कालेज (सांध्य) आत्माराम सनातन धर्म कालेज आदि प्रमुख हैं। जहां की लाईब्रेरी सालों से बिना लाइब्रेरियन के चल रही है।

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जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों डीयू में संसदीय समिति ने दौरा किया था। समिति ने पाया कि प्राचार्यों के साथ लाइब्रेरियन जैसे पदों पर आरक्षण नहीं दिया गया है। उन्होंने निर्देश दिया कि इन पदों को क्लब कर रोस्टर बनाए और जिस वर्ग का जितने आरक्षण-अनुपात कानूनन दिए गए हैं वह दिया जाएं।

परिषद सदस्य प्रो हंसराज सुमन के कहा, यह मामला नया नहीं है, दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स फोरम ने इस मुद्दे को मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अलावा यूजीसी चेयरमैन प्रो वेदप्रकाश व एससी-एसटी कल्याणार्थ संसदीय समिति के अध्यक्ष फग्गन सिंह कुलस्ते के समक्ष भी उठाया है। अब विद्वत परिषद की बैठक में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाए जाने की तैयारी है। बहरहाल, यह बात भी सामने आई कि इस बाबत डीयू के ज्यादातर कालेजों में केंद्र सरकार की आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया है। जिसकी वजह से एससी, एसटी, ओबीसी व विक्लांग लाइब्रेरियन के पद खाली हैं, जबकि यूजीसी के करीब 10 साल पहले आए निर्देश में आरक्षण देने का प्रावधान दिया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वामी श्रद्दानंद कालेज के प्रध्यापक सूरज यादव ने कहा- पूवर्ती यूपीए सरकार के समय से ही पदों में अघोषित कटौती कर दी गई थी। नए कुलपति की सोंच इसके उलट है। ऐसे में आशा है कि किताबों को महत्व दिया जाएगा। पुस्तकालयों की मजबूती लौटेगी और इस कड़ी में लाईब्रेरियनों की स्थायी नियुक्तियां शुरू होंगी।

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