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दिल्ली मेरी दिल्ली: छवि पर दाग

आमतौर पर हर मुद्दे पर बढ़-चढ़कर बोलने वाले मुख्यमंत्री का इतनी बड़ी घटना पर चुप रहना लोगों को अखर गया। दूसरे राजनीतिक दलों ने इसी को मुद्दा बना लिया है। संयोग से यह इलाका उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का विधानसभा क्षेत्र है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंडावली में तीन बच्चियों के भूख हुई मौत की घटना पर बोलने से रह गए। वे मंडावली जा भी नहीं पाए जबकि दिल्ली के सारे नेता भारी बारिश के बावजूद कई दिन तक वहां आते-जाते रहे। देश की राजधानी में घटी इस गंभीर वारदात ने लोगों को बेचैन कर दिया। आमतौर पर हर मुद्दे पर बढ़-चढ़कर बोलने वाले मुख्यमंत्री का इतनी बड़ी घटना पर चुप रहना लोगों को अखर गया। दूसरे राजनीतिक दलों ने इसी को मुद्दा बना लिया है। संयोग से यह इलाका उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का विधानसभा क्षेत्र है। वे भी घटनास्थल पर दूसरे दिन ही गए। इससे पहले बिना पड़ताल के ही उन्होंने कह दिया था कि तीनों बच्चियों की मौत भूख से नहीं हुई। इसके बाद लोगों की नाराजगी और आलोचना होने पर सिसोदिया और उनकी पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुट गई। बीते दिनों दिल्ली पर शासन के अधिकारों को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने अपनी जो छवि बनाने की कोशिश की थी, इस घटना से वह कोशिश नाकाम होती दिख रही है।

तालमेल का खेल

सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ की ओर से दिल्ली पर शासन पर अधिकार पर फैसला आने के बाद इस हफ्ते तीन मासूम बच्चियों के भूख से दम तोड़ने की घटना सामने आई। इस मामले में पूरा प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हो गया, लेकिन राजनिवास से न कोई बयान आया और न ही उपराज्यपाल पीड़ित परिवार से मिलने गए। सालों बाद पहली बार ऐसा हुआ कि इतनी बड़ी घटना पर राजनिवास सक्रिय नहीं दिखा। इसी तरह बारिश के बाद होने वाले जलभराव पर भी राजनिवास ने कोई बैठक नहीं बुलाई। चार जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पुलिस, जमीन और कानून-व्यवस्था के अलावा दिल्ली के सारे मामले दिल्ली सरकार के अधीन हैं और इनके बारे में फैसला लेने का अधिकार उसी का है। यह अलग बात है कि दिल्ली की शासन व्यवस्था ऐसी है कि कोई सरकार चाह कर भी अकेले काम नहीं कर सकती, उसे राजनिवास से तालमेल बिठाना ही पड़ेगा।

-बेदिल

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