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विपक्ष को बाहर निकाल दिल्ली विस में जनलोकपाल बिल पेश

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष को जबरन सदन से बाहर कर आम आदमी पार्टी की सरकार ने बहुचर्चित जनलोकपाल बिल सदन में पेश कर दिया है..

Author नई दिल्ली | Published on: December 1, 2015 1:41 AM
जनलोकपाल विधेयक पेश करने के दौरान सोमवार को भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता को दिल्ली विधानसभा से बाहर ले जाते मार्शल। (पीटीआई फोटो)

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष को जबरन सदन से बाहर कर आम आदमी पार्टी की सरकार ने बहुचर्चित जनलोकपाल बिल सदन में पेश कर दिया है। इस बिल को वैधानिक तरीके से पेश करने की विपक्ष की मांग को सरकार ने दरकिनार कर दिया। इस बिल में पिछले अण्णा आंदोलन के दौरान पेश किए गए बिल से विरोधाभास पर आज स्वराज अभियान ने विरोध प्रदर्शन किया। अभियान के नेताओं का दावा है कि बिल में जानबूझ कर कमियां छोड़ी गईं। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में बिल पेश किया और इसे दिल्लीवासियों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया।

दिल्ली की सत्ता में आने के नौ महीने बाद आप सरकार की ओर से पेश दिल्ली जनलोकपाल विधेयक में एक लोकपाल का प्रावधान है, जिसे राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी सरकारी पदाधिकारी, केंद्र के पदाधिकारियों पर कार्रवाई का अधिकार होगा।
विधानसभा की बैठक शुरू होते ही आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने सदन में एक बार फिर से भाजपा के विधायक ओपी शर्मा का मामला उठा दिया। उधर, विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने उनकी ओर से पेश ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की। सदन में अलका लांबा के साथ आप की महिला विधायक भी भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करती अध्यक्ष के सामने वेल में खड़ी हो गईं। सदन में विपक्ष के नेता अपने विधायक शर्मा का बचाव करने लगे, तो आप की महिला विधायक उनके खिलाफ बोलने लगीं। इससे सदन का माहौल गरमा गया और विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता को शाम चार बजे तक सदन से चले जाने के लिए कह दिया।

विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने पूछा कि उन्हें क्यों सदन से निकाला जा रहा है। उसका जवाब देने के बजाए विधानसभा अध्यक्ष ने मार्शलों से गुप्ता को सदन से बाहर करने के लिए कह दिया। सदन में मार्शल आ गए और गुप्ता को जबरन सदन से ले जाने लगे। मार्शल उनके साथ जोर जर्बदस्ती करने लगे और फिर उन्हें उठा कर सदन से बाहर ले गए। सदन के बाहर गुप्ता की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। गुप्ता के करीबियों ने बताया कि सदन में मार्शलों के साथ हुई धक्का मुक्की में विजेंद्र गुप्ता के शरीर पर चोटें भी आईं हैं।

उधर, दिल्ली विधानसभा में बिल पेश करने से पहले विधानसभा अध्यक्ष और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भाजपा के दोनों विधायकों को सदन में वापस आने का आग्रह किया। लेकिन उस समय विजेंद्र अस्पताल ने अपनी मेडिकल जांच करवा रहे थे।

सदन में विधेयक पेश करने के बाद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे भारत के इतिहास में सबसे ‘प्रभावी एवं स्वतंत्र’ करार दिया और कहा कि प्रस्तावित विधेयक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली क्षेत्र के भीतर होने वाले भ्रष्टाचार के प्रत्येक कृत्य को इसके दायरे में लाता है।

आप नेताओं ने कहा कि लोकपाल को केंद्रीय मंत्रियों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के खिलाफ भी जांच का अधिकार होगा। इससे केजरीवाल और केंद्र के बीच टकराव का एक और दौर शुरू हो सकता है। सिसोदिया ने लोगों को भरोसा दिया कि यह विधेयक उस विधेयक जैसा ही है, जो 2011 के अण्णा आंदोलन के दौरान आया था। उन्होंने इसके ‘पूरी तरह से अलग’ होने के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली चार सदस्यीय चयन समिति तीन सदस्यीय लोकपाल का चयन करेगी। समिति के अन्य सदस्यों में मुख्यमंत्री, राज्य विधानसभाध्यक्ष और विपक्ष के नेता शामिल होंगे।

विधेयक के तहत लोकपाल को केवल एक महाभियोग की प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जिसके लिए विधानसभा में कम से कम दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। आप के पास 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में 67 विधायक हैं। सिसोदिया ने विधेयक की आलोचना करने को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि पार्टी संवैधानिक व्यवस्था से अनभिज्ञ है। महाभियोग विधानसभा की ओर से चलाया जा सकता है सरकार द्वारा नहीं। उन्होंने कहा कि वे कहते हैं कि सरकार ने प्रमुख लोगों को चयन समिति का हिस्सा बनाने संबंधी अंश हटा दिया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एनजेएसी पर चर्चा के दौरान कहा था कि ऐसे व्यक्तियों को शामिल करने से समिति सरकार के प्रभाव में आ सकती है।

सिसोदिया ने विधेयक के प्रमुख प्रावधानों के बारे में बताते हुए कहा कि यह लोकपाल के लिए जांच और अभियोजन शाखा मुहैया कराता है। दीवानी अदालत की शक्तियों वाले लोकपाल को जांच करने का अधिकार होगा और वह स्वत: संज्ञान लेते हुए या शिकायतों के आधार पर मुद्दों को जांच के लिए ले सकता है।

सिसोदिया ने कहा कि यह समयबद्ध जांच और दुर्लभतम मामलों में छह से 12 महीनों में अभियोजन सुनिश्चित करता है। इसे भ्रष्ट कृत्यों में लिप्त अधिकारियों की संपत्ति जब्त करने और कुर्क करने का अधिकार होगा। यह किसी को आजीवन कारावास की सजा दे सकता है। उन्होंने इसके साथ ही भ्रष्टाचार का खुलासा करने वालों को संरक्षण के प्रावधान और उस प्रावधान का भी उल्लेख किया जो निजी कंपनी के अधिकारियों को विधेयक के दायरे में लाता है। उन्होंने सदन में ‘अरविंद केजरीवाल जिंदाबाद और वंदेमातरम’ के नारों के बीच कहा कि यह हमारे लिए और उन सभी के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, जो 1967 से एक मजबूत और स्वतंत्र लोकपाल के लिए संघर्ष कर रहे थे। 2011 का भ्रष्टाचार निरोधक आंदोलन भारत की स्वतंत्रता के बाद के इतिहास के सबसे शक्तिशाली आंदोलनों में से एक था।

ऐसा होगा दिल्ली का जनलोकपाल:

  •  जनलोकपाल किसी लोकसेवक के खिलाफ जांच पूरी होने के बाद यदि ठीक समझे तो अनुशासत्मक कार्रवाई की अनुशंसा कर सकता है या फिर अभियोजन शुरू करवा सकता है।
  • भ्रष्ट कृत्य का दोषी पाए जाने पर सश्रम कारावास का दंड दिया जा सकता है। इसकी अवधि छह माह से कम नहीं होगी जिसे दस साल तक बढ़ाया जा सकता है।
  • किसी अपराध का लाभार्थी कोई व्यापारिक संस्थान हो तो उसे सरकारी खजाने के नुकसान की क्षति का पांच गुना ज्यादा का भुगतान करना होगा। उसकी वसूली दोषी व्यक्ति से की जाएगी।
  • कोई कंपनी यदि दोषी पाई जाती है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा।
  • भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई करने के लिए विशेष अदालतें गठित की जाएंगीं।
  • जनलोकपाल के समक्ष यदि कोई झूठी शिकायत करेगा तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
  • जनलोकपाल के पास पुलिस के भी अधिकार होंगे और वह जांच अधिकारी नियुक्त कर सकता है।
  • जनलोकपाल के पास सिविल कोर्ट जैसे अधिकार भी होंगे।
  • जनलोकपाल के पास अपनी अलग से अभियोजन शाखा होगी।
  • जनलोकपाल को जो भी जानकारी मुहैया करवाएगा उसके चाहने पर उसकी जानकारी गोपनीय रखी जाएगी।

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