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जाकिर मूसा ने अबू दुंजाना को बताया इस्‍लामिक कश्‍मीर के लिए जंग का ‘पहला शहीद’

कश्मीर में सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में मारे गए आतंकी अबु दुजाना और आरिफ की मौत के बाद अब अल-कायदा सूबे में सक्रिय हो गया है।

आतंकी जाकिर मूसा। (Source: Youtube/ Video Grab)

कश्मीर में सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में मारे गए आतंकी अबु दुजाना और आरिफ की मौत के बाद अब अल-कायदा सूबे में सक्रिय हो गया है। इनकी मौत के बाद बीती शुक्रवार (7 अगस्त, 2017) रात कुख्यात आंतकी जाकिर मूसा ने एक ऑडियो टेप जारी किया है। जिसमें दुजाना को इस्लामिक कश्मीर की आजादी में अल-कायदा का पहला शहीद करार दिया है। हालांकि डीजीपी एसपी वैद्य ने ऑडियो की सत्यता पर सवाल उठाए हैं। लेकिन मूसा को दुजाना और आरिफ का करीबी होने से इंकार नहीं किया। गौरतलब है कि भारतीय सुरक्षा बलों ने एक अगस्त (2017) को लश्कर-ए-तैयबा छोड़ अल-कायदा में शामिल हुए अबु दुजाना और आरिफ को मुठभेड़ में मार गिराया था। जाकिर मूसा भी इस साल हिजबुल मुजाहिदीन को छोड़ अल-कायदा में शामिल हुआ था। जिससे घाटी में अल-कायदा की सक्रियता ने सुरक्षा बलों को चिंतित कर दिया है। घाटी में हुईं कई मुठभेड़ों में इस संगठन के आतंकियों के भी शामिल होने की खबरें सामने आती रही हैं।

मामले में डीजीपी वैद्य ने कहा, ‘उन्होंने साल में 2003 में इसी तरह अल-कायदा की उपस्थिति को लेकर दावे किए थे। हमें जानने की जरूरत है कि ऐसे लोगों की पीछे कौन सी ताकते हैं। क्योंकि हमारे लिए एक आतंकी सिर्फ एक आतंकी ही है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता वो किस संगठन का है।’ डीजीपी वैद्य ने आगे कहा कि अबु दुजाना (27 साल) पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का था और लश्कर-ए-तैयबा का मिलिटेंट था। हालांकि मूसा का दावा है कि दुजाना लश्कर छोड़ अल-कायदा में शामिल हो चुका था। दूसरी तरफ सामने आए ऑडियो में कथित तौर पर जाकिर मूसा का दावा है कि अबु दुजाना अल कायदा के कश्मीरी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़ गया था। बता दें कि हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर आतंकी जाकिर मूसा ने अल-कायदा के इस संगठन को कश्मीर में शुरू किया है।

गौरतलब है कि दक्षिणी कश्मीर में मुठभेड़ शुरू होने से पहले अबु दुजाना और आरिफ ललिहारी का एक और ऑडियो वायरल हुआ था। आरिफ ललिहारी ने कश्मीरी में बोलते हुए कहा कि मैं आरिफ हूं। मैं अपने मां-बाप से यह कहना चाहता हूं जहां हम हैं उस मकान मालिक ने कोई गलती नहीं की है। उनके साथ कोई ज्यादती नहीं होनी चाहिए। मेरे जनाजे में पाकिस्तानी झंडा नहीं लहराया जाना चाहिए। बेहतर यही होगा कि मुझे अब्बास भाई के साथ दफनाया जाए। जनाजे में केवल इस्लामी झंडे लहराए जाने चाहिए। दुजाना भाई को कहीं और नहीं दफनाने देना, उन्हें यहीं रखना। अबु दुजाना ने उर्दू में कहा कि यह तो मौत है जिसकी जिंदगी है उसकी तो मौत आनी ही है। अल्लाह ने मुझे शहीद होने का मौका दिया। टेंशन की कोई बात नहीं। मैं खुश हूं अल्लाह ने मुझे यह मौका दिया है। अल्लाह ताला मेरी शहादत कबूल करे।

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