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पिता के दर्द पर भी नहीं पसीजा बेटे का दिल, मुठभेड़ में मारा गया 18 साल का फरहान

पिता ने फेसबुक पोस्ट लिखकर पिछले साल की थी आतंक का रास्ता छोड़कर घर लौटने की अपील, मगर नहीं माना वानी

Author नई दिल्ली | January 9, 2018 7:36 PM
भारतीय सेना के जवान। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

18 वर्षीय आतंकी फरहान वानी की जिंदगी सलामत रहती अगर उसने समय रहते पिता की नेक सलाह मान ली होती। घाटी में आतंक का पांव पसारने में जुटे इस आतंकी को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में मंगलवार की सुबह मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने मार गिराया। 18 वर्षीय आतंकी फरहान वानी कुलगाम के खुदवानी गांव का रहने वाला था। फरहान पिछले साल आतंकवादी ग्रुप से जुड़ा था। उसके इस कदम से पूरा परिवार परेशान चल रहा था। आतंकवादी फरहान के शिक्षा विभाग में कार्यरत पिता गुलाम मोहम्मद वानी ने नवंबर में ही फेसबुक पर मार्मिक अपील कर हिंसा का रास्ता छोड़कर उसे घर लौटने को कहा था। मगर उनकी अपील व्यर्थ चली गई। यह एनकाउंटर ऐसे वक्त में हुआ है जब कि जम्मू-कश्मीर पुलिस घाटी में शांति के लिए आतंकवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर घर लौटने की मुहिम चला रही है। मीडिया रिपोर्ट, के मुताबिक पुलिस अफसरों का कहना है कि आतंकियों को थाने में आकर भी सरेंडर करने की जरूरत नहीं है, बस वो अपने परिवार के साथ जुड़ जाएं तो उन्हें बख्शा जा सकता है। मकसद है कि गुमराह युवाओं को रास्ते पर लाकर घाटी में अमन-चैन कायम की जा सके।

पिता ने लफ्जों में उकेरा दिल का दर्द
आतंकवादी फरहान वानी के पिता गुलाम ने बेटे के लिए यह मार्मिक पोस्ट पिछले साल 24 नवंबर को लिखी थी। इसके बाद फरहान तक परिवार का संदेश पहुंचाने के लिए उसके फेसबुक पेज पर शेयर भी किया था। पिता ने कुछ यूं दिल का दर्द लफ्जों में उकेरा था।

”मेरे प्यारे बेटे जब से तुम हमें छोड़कर गए हो, मेरे शरीर ने धोखा देना शुरू कर दिया है। बेटे मैं तुम्हारे दिए गए दर्द से चीखता हूं, फिर भी उम्मीद है कि तुम लौट आओगे। मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि मैं तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे को कितना मिस करता हूं। एक भी मिनट ऐसा नहीं है, जो तुम्हारी यादों के बगैर गुजरा हो। मुझे उम्मीद है कि तुम ठीक होगे। मैं तुम्हारा पिता हूं, अगर मैं सही-गलत नही बताऊंगा तो कोई और नहीं बताने वाला।”

पिता ने आगे लिखा-”मुझे दुख है, मैं मरने की कगार पर हूं, मेरे पास कोई चारा नहीं है। तुम्हें अभी बहुत कुछ सीखना है, मगर मैं तुम्हें सिखाने और डांटने के साथ सहायता करने के लिए मौजूद नहीं रहूंगा।  मेरे बेटे प्लीज तुम लौट आओ और फिर से नई जिंदगी शुरू करो। जो पथ तुमने चुना है, वह सिवाय दर्द, तनाव और धोखे के कुछ नहीं देगा।” परिवार के नजदीकी सूत्रों ने बताया कि वानी ने फुटबालर से लश्कर-ए-तोयबा के आतंकी बने माजिद खान से प्रेरित होकर आतंकवाद का रास्ता चुना था। जिसका नवंबर में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था।

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