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देश विरोधी नारे लगाने वाले गिलानी के पोते को जम्मू-कश्मीर सरकार ने नियमों में छूट देकर दी लाख रुपये सैलरी की नौकरी

गिलानी के पोते अनीस-उल-इस्लाम को ये नौकरी जम्मू-कश्मीर की पीडीपी-बीजेपी सरकार ने दी है।

Author Published on: March 4, 2017 1:00 PM
कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी (File Photo)

2016 में आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद जब पूरा कश्मीर हिंसा की आग में झुलस रहा था, अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी भारत सरकार के ख़िलाफ़ जहर उगल रहा थे, उसी वक़्त गिलानी के पोते को जम्मू कश्मीर की पीडीपी-बीजेपी सरकार ने नियमों में ढील देकर मोटी पगार की एक नौकरी दी।टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक गिलानी के पोते अनीस-उल-इस्लाम को जम्मू-कश्मीर टूरिज्म की सहायक संस्था शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कंवेक्शन कॉम्पलेक्स (SKICC) में रिसर्च ऑफिसर की नौकरी दी गई है।खबर है कि राज्य के पर्यटन विभाग ने, जो कि सीधे सीएम महबूबा मुफ़्ती की निगरानी में आता है, इस पद पर नियुक्ति की ज़िम्मेदारी जम्मू-कश्मीर स्टेट सबऑर्डिनेट सर्विस रिक्रूटमेंट बोर्ड या राज्य लोक सेवा आयोग को नहीं सौंपी। लेकिन रिसर्च ऑफिसर पर नियुक्ति के लिए ये कानूनी प्रावधान है कि ये ही संस्थाएं इस पद पर नियुक्ति करेंगी।

हालांकि राज्य के पर्यटन सचिव और सीनियर सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन फारुक़ शाह का कहना है कि, ‘ SKICC में नियुक्ति बकायदा नियमों के तहत की गई है।’ उन्होंने बताया कि, ‘हमने कई उम्मीदवारों से आवेदन मंगाये थे, और अनीस इस पद के लिए उपयुक्त पाये गये।’ इस पद के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने अनीस को हर महीने 1 लाख रुपये की सैलरी दी है।

लेकिन SKICC के एक अधिकारी ने टीओआई को बताया कि पर्यटन सचिव ने बहुत पहले ही अनीस की नियुक्ति कर ली थी। इस अधिकारी ने बताया कि, ‘पर्यटन विभाग ने गिलानी के पोते की नियुक्ति तब कि जब गिलानी खुद श्रीनगर की सड़कों पर राज्य और केन्द्र सरकार के ख़िलाफ़ बंद और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।’

सूत्रों के मुताबिक अनीस ने पंजाब के जालंधर से एमबीए की डिग्री की है। और उसे ब्रिटेन भी पढ़ाई के लिए जाना था, लेकिन 2009 में राज्य की सीआईडी से सही रिपोर्ट ना मिलने पर स्टेट पोस्ट ऑफिस ने उसे पासपोर्ट नहीं दिया। लेकिन हाईकोर्ट के ऑर्डर के बाद उसे आखिरकार उसे पासपोर्ट मिला। सीआईडी की ओर वेरीफिकेशन नहीं हो पाने की वजह से अनीस को अब तक इस नौकरी की सैलरी नहीं मिल पाई है। एक बार सीआईडी से जांच पूरी होने के बाद राज्य सरकार को बकाये की पूरी रकम अनीस को देगी होगी।

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