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श्रीनगर से हटाया गया कर्फ्यू, कश्मीर घाटी में धारा-144 लागू

आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से ही अलगाववादी समूहों का विरोध प्रदर्शन जारी है।
Author श्रीनगर | October 29, 2016 15:23 pm
श्रीनगर में कर्फ्यू के दौरान तैनात पुलिस। (पीटीआई फाइल फोटो)

श्रीनगर से शनिवार (29 अक्टूबर) को कर्फ्यू हटा दिया गया जिससे वहां लोगों की और वाहनों की आवाजाही तेज हो गई, वहीं कश्मीर घाटी में लोगों के एकत्र होने पर अब भी प्रतिबंध लगा हुआ है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शहर के उन छह थाना क्षेत्रों से कर्फ्यू हटा दिया गया है, जहां शुक्रवार (28 अक्टूबर) को यह लगाया गया था। उन्होंने बताया कि शहर के नौहट्टा इलाके में जामिया मस्जिद तक मार्च निकालने के अलगाववादियों के आह्वान के मद्देनजर कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए कल यहां कर्फ्यू लगाया गया था, लेकिन आज (शनिवार, 29 अक्टूबर) सुबह स्थिति में सुधार देखते हुए उसे हटा दिया गया। अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में लोगों की आवाजाही पर कहीं भी प्रतिबंध नहीं है, लेकिन सीआरपीसी की धारा 144 के तहत पूरी घाटी में कहीं भी लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध हैं। उन्होंने कहा कि कर्फ्यू हटाने के बाद शहर में वाहनों और लोगों की आवाजाही में बढ़ोतरी देखी जा रही है। निजी कार और ऑटो रिक्शा भी आज (शनिवार को) सड़कों पर पहले की तुलना में अधिक दिखें। टीआरसी चौक-बटमालू में शनिवार को रेहड़ी पटरी वाले भी वापस लौट आए, वहीं श्रीनगर के बाहरी इलाकों और सिविल लाइन में भी कई दुकानें खुलीं।

हालांकि शनिवार को लगातार 113वें दिन भी कश्मीर घाटी में अलगाववादियों द्वारा आहूत बंद के कारण आम जनजीवन बाधित रहा। अधिकारी ने बताया कि संवेदनशील स्थानों और मुख्य मार्गों के पास ऐहतियाती तौर पर बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है, ताकि कानून एवं व्यवस्था बनी रहे और लोग दैनिक कार्य के लिए सुरक्षित महसूस करें। आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से ही अलगाववादी समूहों का विरोध प्रदर्शन जारी है। घाटी में जारी झड़पों में अभी तक दो पुलिस कर्मियों समेत 85 लोगों की मौत हो चुकी है और कई हजारों घायल हुए हैं। झड़पों में सुरक्षा बलों के करीब 5,000 कर्मी भी घायल हुए हैं। जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत 300 से अधिक लोगों पर मामला दर्ज किया गया है।

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