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पश्चिमी पाकिस्‍तान के हिंदुओं को पहचान पत्र पर कश्‍मीर में बवाल तो जम्‍मू में रोहिंग्‍या मुसलमानों पर हल्‍ला

पश्चिमी पाकिस्‍तान के शरणार्थियों को पहचान दस्‍तावेज देने के मसले ने जम्‍मू कश्‍मीर में नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
Author December 27, 2016 08:42 am
पश्चिमी पाकिस्‍तान के शरणार्थियों को पहचान दस्‍तावेज देने के मसले ने जम्‍मू कश्‍मीर में नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। (Express Photos by Arun Sharma)

पश्चिमी पाकिस्‍तान के शरणार्थियों को पहचान दस्‍तावेज देने के मसले ने जम्‍मू कश्‍मीर में नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है। इस मामले के चलते राज्‍य के क्षेत्रीय और धार्मिक मांग पर बंटने का खतरा पैदा हो गया है। घाटी में अलगाववादी और मुख्‍य विपक्षी पार्टियां पीडीपी-भाजपा गठबंधन पर श‍रणार्थियों को सर्टिफिेकेट देकर राज्‍य से जुड़े कानूनों को खत्‍म करने करन का आरोप लगा रही है। वहीं जम्‍मू में नेताओं का कहना है कि रोहिंग्‍या मुसलमानों को बसाने का कदम क्षेत्र की जनसांख्यिकी का बदलने का प्रयास है। सरकार ने इस पर बचाव में कहा है कि पश्चिमी पाकिस्‍तान के शरणार्थी जिनमें लगभग सभी हिंदू हैं वे बंटवारे के वक्‍त जम्‍मू कश्‍मीर आए थे और यह मसला नॉन स्‍टेट सब्‍जेक्‍ट है। सरकार के प्रवक्‍ता और शिक्षा मंत्री नईम अख्‍तर ने बताया, ”हम उन्‍हें केवल पहचान दस्‍तावेज दे रहे हैं जिससे कि उन्‍हें पैरामिलिट्री फॉर्सेज और भारत सरकार के अन्‍य संस्‍थानों में नौकरी मिलने में मदद हो सके।”

कश्‍मीर के सोपोर कस्‍बे में पश्चिमी पाकिस्‍तान के शरणार्थियों के मुद्दे पर शुक्रवार की नमाज के बाद हिंसक प्रदर्शन हुए थे। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठियां बरसानी पड़ीं। जम्‍मू कश्‍मीर लिबरेशन फ्रंट चेयरमैन यासिन मलिक को श्रीनगर में हिरासत में लिया गया, वहीं हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने पुराने श्रीनगर में प्रदर्शन किया। नेशनल कांफ्रेंस ने सर्टिफिकेट देने के बारे में कहा कि शरणार्थियों को स्‍थायी निवासियों का दर्जा और संपत्ति का अधिकार देने की दिशा में यह पहला कदम है। जम्‍मू में भाजपा नेताओं का कहना है कि वे आगामी बजट सत्र के दौरान राज्‍य मे रोहिंग्‍या मुसलमानों की बढ़ती संख्‍या का मुद्दा उठाएंगे। नौशेरा से विधायक रविंदर रैना ने कहा, ”उनके संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं है। संवेदनशील सीमाई राज्‍य में उन्‍हें बसाया जाना राष्‍ट्र की सुरक्षा के लिए बड़ी खतरा है।”

रोहिंग्‍या मुसलमानों का नाम लिए बिना चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री ऑफ जम्‍मू ने उनकी मौजूदगी को कुटील अभियान बताया। चैंबर के अध्‍यक्ष राकेश गुप्‍ता ने जम्‍मू के लोगों से कहा कि वे आखिरी लड़ाई के लिए तैयार रहें। उन्‍होंने आर्टिकल 370 लागू करने में राज्‍य सरकार पर दोहरी नीति का आरोप लगाया। गुप्‍ता ने कहा कि एक तरफ सैनिक कॉलोनी और पंडित कॉलोनी बनाने का प्रस्‍ताव रद्द कर दिया, वहीं विदेशी नागरिकों केा गलत तरीके से बसाया जा रहा है। म्‍यांमार से मुस्लिम शरणार्थी कई सालों से जम्‍मू आ रहे हैं। वे ना तो भारत के नागरिक हैं और ना ही राज्‍य के स्‍थायी निवासी हैं।

पश्चिम पाकिस्‍तान शरणार्थी नेता लाभा राम गांधी ने बताया कि पश्चिमी पाकिस्‍तान से मूलत: 5764 परिवार अंतरराष्‍ट्रीय सीमा के पास रहते हैं। यह अब बढ़कर 20 हजार हो चुके हैं और जम्‍मू, सांबा व कठुआ जिलों में रहते हैं। इनमें से 20 परिवार मुसलमानों के हैं। यहां उनकी 4-5 पीढि़यां हो चुकी हैं। वे भारतीय नागरिक हैं लेकिन जम्‍मू कश्‍मीर के स्‍पेशल स्‍टेटस के चलते राज्‍य के निवासी नहीं है। इसके चलते वे ना तो राज्‍य में जमीन खरीद सकते हैं और ना उनके बच्‍चों को एडमिशन या नौ‍करियों में स्‍टेट कोटा मिलता है। वे लोकसभा चुनावों में वोट डालते हैं लेकिन विधानसभा में ऐसा नहीं कर पाते।

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  1. Rakesh Shukla
    Dec 27, 2016 at 3:41 am
    रोहिंग्या मुस्लिमों को कश्मीर में बसना बहुत घातक कदम है, इन्हें पाक अधिकृत कश्मीर में भेज देना चाहिए, किसी भी हालत में इनका कश्मीर में बसना भारत के हिट में ठीक नही है, एक तरफ कश्मीरी पंडितों का विरोध कर रहे हैं उग्रवादी, दूसरी तरफ रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण दे रहे हैं उग्रवादी
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    Reply
    1. V
      vinod
      Dec 27, 2016 at 5:09 am
      पृत्येक रिफ्यूजी का सम्मान किया जाना चाहिए
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