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राष्ट्रीय संप्रभुता से कोई समझौता नहीं : राजनाथ

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि पीडीपी-भाजपा सरकार मौजूदा हालात को संभाल पाने में विफल रही है।

Author September 8, 2016 12:26 AM
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल (एपीडी) ने राज्य में सभी पक्षों से बातचीत की वकालत की। सरकार ने कहा कि वह सभी से बातचीत के लिए तैयार है लेकिन उसने अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस का कोई उल्लेख नहीं किया। बीते चार-पांच सितंबर को राज्य का दौरा करने वाले एपीडी की तीन घंटे चली बैठक में भारत-पाक वार्ता को फिर से शुरू करने, विश्वास बहाली कदमों का एलान करने और अशांत घाटी में शांति लाने के लिए ‘दोहरे’ प्रयासों की मांगें उठीं। प्रतिनिधिमंडल की अगुआई करने वाले केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बैठक में यह साफ संदेश दिया गया कि राष्ट्रीय संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रस्ताव पढ़ा, ‘प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की राय है कि सभ्य समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं है। राष्ट्रीय संप्रभुता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता।’ राजनीतिक दलों ने राज्य की जनता से हिंसा का रास्ता छोड़ने की और सारे मुद्दों का समाधान संवाद और विचार-विमर्श के जरिये निकालने की अपील की। एपीडी के बयान के मुताबिक, ‘राष्ट्रीय संप्रभुता के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं हो सकता।’ बैठक में दोनों सरकारों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि शिक्षण संस्थानों, सरकारी दफ्तरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जल्द सामान्य कामकाज शुरू हो। उन्होंने सरकार से सभी नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने और आंदोलन में घायल हुए नागरिकों  एवं सुरक्षाकर्मियों को इलाज मुहैया कराने का अनुरोध किया।

प्रस्ताव में केंद्र और राज्य सरकारों से सभी पक्षों के साथ संवाद करने का अनुरोध किया गया है वहीं वामपंथी दलों ने भारत-पाक वार्ता फिर से शुरू करने और असैन्य क्षेत्रों से आफस्पा को हटाने जैसे विश्वास बहाली के कदमों की घोषणा की वकालत की। एपीडी के बयान में हुर्रियत कांफ्रेंस समेत अलगाववादियों का कोई उल्लेख किए बिना केंद्र और राज्य सरकारों से सभी पक्षों के साथ बातचीत के लिए कदम उठाने को कहा गया है। इस बारे में जितेंद्र सिंह से पूछा गया कि क्या इन पक्षो में अलगाववादियों को भी गिना जाएगा। इस पर सिंह ने कहा कि गृहमंत्री सभी पक्षों से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने ज्यादा विस्तार से कुछ नहीं कहा। विपक्ष के कुछ नेताओं ने अनेक उप जेलों में बंद हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं से मुलाकात की थी, वहीं कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने उनसे मिलने से मना कर दिया था।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अलगाववादी संगठन ‘सभी पक्षों’ में शामिल हैं। खड़गे ने कहा कि सरकार ने पैलेट गनों की जगह पावा गोलों के इस्तेमाल की घोषणा की थी लेकिन मंगलवार को ही पैलेट से चोटिल एक शख्स की मौत हो गई। माकपा के सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तरह ठोस कदम उठाना चाहिए, जिन्होंने एकपक्षीय संघर्ष विराम घोषित किया था और आतंकवादी समूह हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ बातचीत की थी। येचुरी ने बताया कि महबूबा मुफ्ती की अगुआई वाली जम्मू-कश्मीर सरकार के कामकाज पर कोई बातचीत नहीं हुई।

आॅल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि व्यक्तिगत रूप से उन्हें लगता है कि पीडीपी-भाजपा सरकार मौजूदा हालात को संभाल पाने में विफल रही है। यह आरोप-प्रत्यारोप का समय नहीं है। यह समय कश्मीर में शांति लाने के लिए एकजुट होकर काम करने का है। ओवैसी ने एपीडी की बैठक में कहा कि राजनीतिक दलों की एक गैर-भाजपाई और गैर-कांगे्रेसी तथ्यान्वेषी टीम को जम्मू-कश्मीर का दौरा करके विभिन्न वर्गों के लोगों से मिलना चाहिए और हिंसा से हुए नुकसान का जायजा लेना चाहिए। कश्मीर घाटी में कुछ लोगों को अवैध तरीके से जेल में बंद होने का आरोप लगाते हुए एआइएमआइएम नेता ने उन्हें रिहा करने की मांग की और कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री को कश्मीर के चार बड़े अखबारों के संपादकों के साथ बातचीत करनी चाहिए। येचुरी और ओवैसी के अनुसार गृहमंत्री ने इस बात से इनकार किया कि अलगाववादी नेताओं को मुहैया कराई गई सुरक्षा में कमी लाने की कोई योजना है।

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में लगातार बढ़ रही तल्खी में एक कड़ी और जुड़ गई जब पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त गौतम बम्बावाले के साथ हुई अशिष्टता को लेकर भारत सरकार ने बुधवार को पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर विरोध दर्ज कराया। मंगलवार को कराची चैंबर आॅफ कॉमर्स में कार्यक्रम को आयोजकों ने आखिरी वक्त में रद्द कर दिया था। बम्बावाले इस कार्यक्रम को संबोधित करने वाले थे। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सुजाता मेहता ने बासित को साउथ ब्लॉक बुलाया और बम्बावाले के साथ हुई अशिष्टता पर भारत सरकार की चिंताएं जाहिर की। मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि उन्हें (बासित को) हमारी इस उम्मीद के बारे में भी बताया गया कि पाकिस्तान में हमारे मान्यता प्राप्त राजनयिकों को बगैर किसी बाधा के अपना सामान्य कामकाज करने दिया जाएगा।

बासित को ऐसे समय में तलब किया गया जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ ने इस्लामाबाद में बुधवार को भाषण के दौरान भारत पर निशाना साधते हुए परोक्ष रूप से आरोप लगाया कि वह कश्मीर में लोगों पर गोलियां बरसा रहा है। शरीफ ने कश्मीर को पाकिस्तान की जीवनरेखा भी करार दिया। कश्मीर में आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग का समर्थन करते हुए शरीफ ने कहा कि घाटी के दबाए गए लोग अपने वाजिब हक की मांग करने पर फिर सरकारी आतंकवाद के बदतरीन स्वरूप और दमन से जूझ रहे हैं। आतंकवाद और कश्मीर के हालात के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी जुबानी जंग जारी है। भारत ने पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया है जबकि पाकिस्तान नई दिल्ली पर मानवाधिकार हनन के आरोप मढ़ कर कश्मीर मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश में है।

पिछले दिनों चीन में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि दक्षिण एशिया का एक ही देश आतंक के एजेंटों को फैला रहा है। मोदी ने आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों को पुरस्कृत करने के बजाय प्रतिबंधित और अलग-थलग करने की मांग की थी।
पाक उच्चायुक्त तलब

कश्मीर में फिर झड़पें, चार घायल

कश्मीर के अनंतनाग जिले में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियो के बीच बुधवार को झड़पों की नई घटनाएं हुर्इं। इनमें कम से कम चार लोग घायल हो गए हैं। पूरी घाटी में लोगों के एक साथ जुटने पर अभी भी पाबंदी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने अनंतनाग में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पैलेट और आंसू गैस के गोले छोड़े थे जिनकी चपेट में आने से चार लोग घायल हुए। कश्मीर के किसी भी हिस्से में कर्फ्यू नहीं लगा है लेकिन श्रीनगर को छोड़ कर घाटी के सभी जिलों में लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगी हुई है। कानून-व्यवस्था कायम रखने के लिए यह पाबंदी जारी रहेगी। घाटी में अलगवावादी समर्थित हड़ताल के कारण जनजीवन प्रभावित रहा।

श्रीनगर तथा अन्य स्थानों पर बाजारों में मंगलवार शाम आगामी ईद के मद्देनजर रौनक लौट आई। ईद-उल-अजहा 13 सितंबर को है। मंगलवार शाम छह बजे तक, हड़ताल में 12 घंटे की ढील दी गई थी। इसके चलते लाल चौक समेत आसपास के बाजारों और जिला मुख्यालयों के बाजारों में भीड़भाड़ रही। लाल चौक के इर्द-गिर्द यातायात जाम देखा गया। अलगाववादियों ने हड़ताल की अवधि 16 सितंबर तक बढ़ा दी है। हफ्ते के कुछ दिन इसमें क्रम दर क्रम ढील देने की घोषणा भी की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 71वें सत्र में ज्ञापन जमा करने के लिए अलगाववादियों ने ईद के दिन संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह के स्थानीय कार्यालय तक रैली निकालने का आह्वान किया है। घाटी में अब तक हुई झड़पों में दो पुलिसकर्मियों समेत 73 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि हजारों लोग घायल हैं।

जनता को गुमराह कर रहा है केंद्र’

हुर्यित कांफ्रेंस ने बुधवार को कहा कि कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के खिलाफ केंद्र की ओर से कड़े कदम उठाने संबंधी खबरें भारत की जनता को ‘बेवकूफ बनाने और गुमराह करने’ का प्रयास है। मीरवाइज उमर फारूक की अगुआई वाले हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी धड़े के प्रवक्ता ने कहा, ‘इन तरकीबों का मकसद भारत के लोगों को बेवकूफ बनाना और गुमराह करना है और ऐसा माहौल तैयार करना है ताकि भारत की जनता का ध्यान जमीनी स्तर के वास्तविक मुद्दे से भटकाए जाए और उनको इस बारे में बेखबर रखा जाए।’

उन्होंने कहा कि हुर्रियत ‘उन बकवास बातों और झूठ को सिरे से खारिज करता है जो प्रतिरोधी (अलगाववादी) नेतृत्व के खिलाफ मीडिया द्वारा फैलाया जा रहा है।’ प्रवक्ता ने कहा, ‘कश्मीर के लोगों के लिए यह कोई हैरानी की बात नहीं है जो हर दिन दुनिया के तथाकथित ‘सबसे बड़े लोकतंत्र’ के असली चेहरे से रूबरू होते हैं और इसकी मार को सहते हैं। वे जानते हैं कि यह कितना नीचे गिर सकता है और यह कितना जवाबी हिंसा कर सकता है।’ उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अलगाववादी नेताओं को दी गई सुविधाओं के ब्यौरे के साथ सामने आना चाहिए। प्रवक्ता ने कहा कि कुछ नेताओं को खतरे के सरकार के आकलन के आधार पर पुलिस की सुरक्षा प्रदान की गई है।

सुरक्षा काफिले पर आतंकी हमला, दो जवान घायल

कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में सैनिकों के काफिले पर आतंकवादियों द्वारा किए गए एक हमले में बुधवार को दो जवान घायल हो गए। सेना के अधिकारियों ने बताया कि कुपवाड़ा जिले के हंडवाड़ा में आतंकवादियों ने सेना के काफिले पर हमला किया। इसमें दो जवान घायल हो गए। हमला करने के बाद आतंकवादी घटनास्थल से फरार हो गए। आतंकवादियों की धड़-पकड़ करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

 

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