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कश्मीर हिंसा: राजनाथ सिंह बोले- युवाओं के भविष्य से न खेलें, महबूबा ने कहा- कश्मीर को जहन्नुम नहीं बनने देंगे

राजनाथ सिंह ने कश्मीर की समस्या को देश की समस्या बताया और राज्य की जनता से अपील की कि वे शांति स्थापित करने में सरकार की मदद करें।

Author श्रीनगर | August 25, 2016 10:18 PM
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह। (फाइल फोटो)

कश्मीर में पिछले 47 दिन से चल रही हिंसा में बड़े स्तर पर लोगों के चोटिल होने का कारण बनी पैलेट गनों का इस्तेमाल जल्द बंद किया जा सकता है और इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार (25 अगस्त) को कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अगले कुछ दिन में पैलेट गनों का कोई विकल्प दिया जाएगा। जम्मू कश्मीर की जनता तक पहुंचने के केंद्र सरकार के प्रयासों के तहत एक महीने के अंदर दूसरी बार राज्य के दौरे पर पहुंचे राजनाथ ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ‘इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत’ के दायरे में जम्मू कश्मीर में सामने आने वाली समस्याओं पर किसी से भी बात करने को तैयार है।

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की मौजूदगी में सिंह ने अपनी कश्मीर यात्रा के दूसरे और अंतिम दिन संवाददाताओं से कहा कि दिल्ली से एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल घाटी आएगा और देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले कश्मीरियों की किसी तरह की चिंता पर ध्यान देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। कश्मीर में अशांति को गुरुवार को 48वां दिन हो गया, जहां सिंह ने कहा कि भारत का भविष्य कश्मीर के भविष्य के साथ जुड़ा है।

उन्होंने कहा, ‘अगर कश्मीर का भविष्य सुरक्षित नहीं है, तो भारत का भविष्य भी सुरक्षित नहीं हो सकता।’ भीड़ को नियंत्रित करने के तरीकों में पैलेट गनों के इस्तेमाल के विवाद पर गृहमंत्री ने कहा कि इस पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट तीन या चार दिन में मिलने की उम्मीद है। पैलेट गनों के इस्तेमाल से घाटी में बड़ी संख्या में लोगों की आंखों की रोशनी चले जाने के मामले भी आए हैं। उन्होंने कहा, ‘आने वाले कुछ दिन में हम पैलेट गनों का विकल्प देंगे। पहले इन गनों को घातक नहीं समझा जाता था लेकिन कुछ घटनाएं हुईं। हमने एक महीने पहले एक विशेषज्ञ समिति बनाई थी जिससे दो महीने में रिपोर्ट मिलने की संभावना थी लेकिन यह रिपोर्ट बहुत जल्द आएगी।’

सिंह ने कहा कि सुरक्षा बल घाटी में प्रदर्शनकारियों से निपटने में संयम बरतते हैं। हालात से निपटने में 4,000 से अधिक जवान घायल हो गए। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवक मारे जाएं या सुरक्षाकर्मियों की जान गई हो, किसी भी घटना पर भारत के लोगों को पीड़ा होती है। सिंह ने कहा, ‘क्या हम कश्मीर को इस हालात से बाहर नहीं निकाल सकते? मैं कश्मीर में सभी लोगों से अपील करता हूं कि घाटी के भविष्य के साथ नहीं खेलें।’

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गत आठ जुलाई को हिज्बुल आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से भड़की हिंसा में दो पुलिसकर्मी समेत करीब 66 लोग मारे गए हैं और कई हजार लोग घायल हो गए। सिंह ने कहा, ‘‘वर्ष 2010 में कहा गया था कि पैलेट गन गैर-घातक हथियार है जिससे कम से कम नुकसान हो सकता है। लेकिन अब हमें लगता है कि इसका कोई विकल्प होना चाहिए।’ सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार आने वाले दिनों में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को कश्मीर लाना चाहती है। उन्होंने कहा, ‘मैंने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से इस बारे में बातचीत की है और उनसे बंदोबस्त करने को कहा है ताकि प्रतिनिधिमंडल यहां जनता से मिल सके।’

सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कश्मीर में हालात को लेकर चिंतित हैं और हाल ही में उन्होंने अपनी पीड़ा बयां की। उन्होंने कहा, ‘कश्मीर के हालात पर वह मेरे साथ लगातार संपर्क में हैं।’ सिंह ने कहा कि कश्मीर के युवाओं के हाथ में पत्थरों के बजाय किताबें और कलम होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘कौन उन्हें हाथों में पत्थर लेने को मजबूर कर रहा है। क्या वे लोग उनके भविष्य की गारंटी देंगे?’ कश्मीरी युवाओं के प्रति सरकार की चिंता को जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, ‘हम कश्मीरी युवाओं का भविष्य ठीक वैसे ही देखते हैं जिस तरह हम भारत में कहीं भी युवाओं के भविष्य को देखते हैं।’

सिंह ने कहा कि नागरिकों की जिम्मेदारी है कि देश के दूसरे हिस्सों में पढ़ने वाले या काम करने वाले कश्मीर के लोगों को सम्मान और सुरक्षा मिले। उन्होंने कहा, ‘कश्मीरियों के साथ हमारे परिवार के सदस्यों की तरह बर्ताव होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि समस्या पैदा करने वाले लोगों को पहचानने की और गुमराह हो गए युवकों को हिंसा का रास्ता नहीं अपनाने के लिहाज से समझाने-बुझाने की जरूरत है। सिंह ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि लोगों का मारा जाना बंद हो। कौन लोग हैं जो नहीं चाहते कि यह रुके?’

जब गृहमंत्री से पूछा गया कि क्या केंद्र कश्मीर को राजनीतिक मुद्दे के बजाय सामाजिक समस्या के तौर पर ले रहा है तो उन्होंने कहा, ‘हालात को लेकर हमारी समझ पर सवाल नहीं करें। हम इसे सही परिप्रेक्ष्य में समझते हैं और समाधान खोजने का प्रयास कर रहे हैं।’ एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सिंह ने कहा कि शहर में सीआरपीएफ की जगह बीएसएफ को तैनात करने के बारे में अनावश्यक विवाद पैदा करने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘पहले भी इन बलों को तैनात किया गया है। हमें इसमें किसी तरह के संकेत नहीं खोजने चाहिए।’

गृहमंत्री से पूछा गया था कि क्या बीएसएफ को सीआरपीएफ के जवानों को अनुशासित करने के लिए लाया गया है जिन पर लोगों के उत्पीड़न के आरोप हैं। गृहमंत्री ने दोहराया कि केंद्र सरकार कश्मीर का विकास चाहती है और पीडीपी के साथ भाजपा के ‘एजेंडा ऑफ अलायंस’ का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हम एजेंडा ऑफ अलायंस के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम कश्मीर का विकास चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने 10,000 एसपीओ की भर्ती का ऐलान किया है।’ सिंह ने कहा, ‘हम केंद्रीय सशस्त्र अर्द्धसैनिक बल की एक बटालियन तैनात करेंगे।’

 

गृह मंत्री राजनाथ सिंह और जम्मू-कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती की प्रेस वार्ता:

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