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कश्मीर घाटी में फिर से शुरू हुआ समाचार पत्रों का प्रकाशन

कश्मीर घाटी में गुरुवार (21 जुलाई) को पांच दिनों के बाद स्थानीय समाचार पत्रों का प्रकाशन फिर से शुरू हो गया।

Author श्रीनगर | July 21, 2016 3:35 PM
गुरुवार (21 जुलाई) को श्रीनगर में सुबह के वक्त हॉकर से अखबार खरीदकर पढ़ते हुए कश्मीरी। (AP Photo/Mukhtar Khan)

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के शहर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों के संपादकों और मालिकों से मुलाकात करने और मीडिया पर पाबंदियों को लेकर खेद जताए जाने के एक दिन बाद कश्मीर घाटी में गुरुवार (21 जुलाई) को पांच दिनों के बाद स्थानीय समाचार पत्रों का प्रकाशन फिर से शुरू हो गया। सरकार द्वारा कथित तौर पर प्रतिबंधित समाचार पत्रों सहित अधिकांश स्थानीय समाचार पत्र गुरुवार (21 जुलाई) को प्रकाशित हुए। साथ ही समाचार पत्र वितरक और हॉकर अपने कामों पर लौट गए।

समाचार पत्र के एक वितरक ने यहां पर बताया, ‘यह अच्छा है कि समाचार पत्रों का प्रकाशन एक बार फिर शुरू हो गया। हम ना केवल व्यापारिक दृष्टिकोण से खुश हैं बल्कि इससे घाटी की तथ्यात्मक सूचना का भी प्रसार होगा जहां पर अफवाहों का बाजार गर्म है।’ पुलिस द्वारा कथित तौर पर कुछ प्रिंटिंग संस्थानों पर छापेमारी और समाचार पत्रों की जब्ती के साथ प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद शनिवार (16 जुलाई) से घाटी में अंग्रेजी, उर्दू या कश्मीरी किसी भी भाषा में समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं हो रहा था।

पुलिस की कार्रवाई के बाद, कश्मीर स्थित समाचार पत्रों के संपादकों, प्रिंटर्स और प्रकाशकों ने शनिवार (16 जुलाई) को एक बैठक का आयोजन किया था जिसमें उन्होंने सरकार द्वारा प्रतिबंध नहीं हटाने और माफी नहीं मांगने तक अपना प्रकाशन बंद रखने का निर्णय लिया। पत्रकारों ने प्रतिबंध के खिलाफ एक प्रदर्शन का भी आयोजन किया था और इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर एक हमला करार दिया था और अपना काम बंद कर दिया था। हालांकि, मंगलवार (19 जुलाई) को सरकार ने कहा कि समाचार पत्रों के प्रिंटिंग और प्रकाशन पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि श्रीनगर और बडगाम के जिला क्लेक्टरों ने स्पष्ट किया है कि जिलों में प्रिंटिंग और समाचार पत्रों के प्रकाशन पर कोई प्रतिबंध नहीं था। हालांकि, समाचार पत्रों के संपादकों और मालिकों ने बुधवार (20 जुलाई) को कहा था कि जब तक प्रेस आपातकाल को लेकर सरकार का रुख नहीं बदलता है उन्हें दुख है कि तब तक समाचार पत्रों का फिर से प्रकाशन संभव नहीं है। उन्होंने एक बयान में कहा कि सरकार को एक बयान जारी कर कर्मियों की गतिविधियों, समाचार एकत्र करने, प्रिंटिंग और समाचार पत्रों के वितरण को लेकर मीडिया के अभियानों में बाधा नहीं डालने को लेकर गारंटी देनी चाहिए।

हालांकि, बुधवार (20 जुलाई) मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान प्रतिबंधों पर खेद जताया था। इसके बाद उन्होंने अपना प्रकाशन शुरू करने का निर्णय लिया। महबूबा ने उनसे कहा कि समाचार पत्रों के प्रकाशन पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाने का सरकार द्वारा जानबूझ कर प्रयास नहीं किया गया था लेकिन कुछ संवादहीनता के कारण जो कुछ भी हुआ वह खेदजनक है। मुख्यमंत्री ने संपादकों और मालिकों को आश्वसन दिया कि सरकार पत्रकारों और समाचार पत्र के अन्य कर्मियों के अधिकतम संभव सीमा तक निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगी ताकि वे परेशानी मुक्त तरीके से अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार हर कीमत पर मीडिया को स्वतंत्रता देने के लिए प्रतिबद्ध है और मौजूदा हालात में अगर मीडिया के खिलाफ किसी तरह की मनमानी करने की शिकायतें मिलती हैं तो इसे देखा जाएगा।

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