आतंकी बना पेटीएम में काम करने वाला एमबीए जुनैद, AK 47 के साथ डाली फोटो, पांच दिन पहले पिता बना था हुर्रियत चीफ

जम्मू- कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ सेहराई का 26 वर्षीय बेटा जुनैद अशरफ आतंकवादी समूह हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो गया है।’’ मोहम्मद अशरफ सेहराई को 19 मार्च को जम्मू- कश्मीर के तहरीक-ए-हुर्रियत का अध्यक्ष चुना गया था।

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तहरीक-ए-हुर्रियत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ सेहराई का बेटा जुनैद 23 मार्च से अपने घर से लापता है। शनिवार 24 मार्च को उसकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई (फोटो-Twitter)

तहरीक-ए-हुर्रियत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ सेहराई का बेटा आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो गया है। जम्मू- कश्मीर पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ सेहराई का 26 वर्षीय बेटा जुनैद अशरफ आतंकवादी समूह हिजबुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो गया है।’’ मोहम्मद अशरफ सेहराई को 19 मार्च को जम्मू- कश्मीर के तहरीक-ए-हुर्रियत का अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने 15 साल से इस पद पर काबिज सैयद अली शाह गिलानी की जगह ली थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि जुनैद अशरफ शुक्रवार से जुम्मे की नमाज के बाद से ही गायब है। अधिकारी ने बताया कि जुनैद अशरफ की एके-47 लिए, आर्मर वेस्ट पहने तस्वीर सोशल मीडिया पर शनिवार को वायरल हो गई थी। फोटो के साथ लिखा था, ‘‘जुनैद अशरफ जिसने कश्मीर विश्वविद्यालय से बिजनेस में मास्टर डिग्री की पढ़ाई की थी, उसे संगठन ने अमार भाई नाम दिया है।’’ जुनैद अशरफ के परिवार ने शनिवार को उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के सूत्रों के मुताबिक जुनैद ने दक्षिण कश्मीर में हिजबुल का सदस्य बना है। श्रीनगर के बागहट बरजुल्ला के रहने वाले जुनैद की पढ़ाई श्रीनगर के ओक हिल स्कूल में हुई है। उसने श्रीनगर इस्लामिया कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। बाद में इस शख्स ने कश्मीर यूनिवर्सिटी से बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री हासिल की है। मोहम्मद अशरफ सेहराई के परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि मास्टर्स डिग्री लेने के बाद जुनैद पेटीएम में काम करने लगा। जुनैहद मोहम्मद अशरफ के चार बच्चों (तीन भाई, एक बहन) में सबसे छोटा है।

बता दें कि 74 साल के मोहम्मद अशरफ सेहराई को सैयद अली शाह गिलानी का करीबी माना जाता है। सूत्रों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर इस अलगाववादी नेता के विचार गिलानी से कट्टर हैं। इन दोनों जमात-ए-इस्लामी से अलग होकर हुर्रियत की स्थापना की थी। जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी नेताओं की इस बात को लेकर आलोचना होती है कि उन्होंने अपने बच्चों को आतंकी संगठनों से दूर रखा है। माना जा रहा है कि जुनैद के इस कदम की आड़ में मोहम्मद अशरफ सेहराई संगठन और कश्मीर में अपना प्रभुत्व बढ़ाना चाहता है।

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