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टेरर फंडिंग केस में कश्मीर में एनजीओ और राइट्स ग्रुप पर NIA की छापेमारी, महबूबा भड़कीं

NIA ने जम्मू-कश्मीर में कुछ एनजीओ और अन्य संगठनों के दफ्तर पर छापा मारा। इसके बाद महबूबा मुफ्ती भड़क गईं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी बीजेपी की पालतू है और उसी के इशारे पर लोगों को परेशान करती है।

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जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)
तिरंगे पर दिए अपने बयान की वजह से महबूबा मुफ्ती पहले से ही चर्चा में हैं। इस बीच कुछ जगहों पर NIA के छापे की वजह से वह और भी भड़क गई हैं। महबूबा ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियां बीजेपी के इशारे पर काम करती हैं और जो लोग बीजेपी की बात नहीं मानते उनकी आवाज दबाने का काम करती हैं। टेरर फंडिंग मामले में NIA ने श्रीनगर में 10 जगहों पर छापा मारा। इसमें कुछ गैरसरकारी संगठन और स्थानीय अखबार के कार्यालय भी शामिल हैं।

NIA के मुताबिक ये संगठन अज्ञान दानदाताओं से पैसा ले रहे थे और उनका इस्तेमाल आतंकवादी क्रियाकलाप में कर रहे थे। दूसरी तरफ एनआईए ने बांदीपुरा और बेंगलुरु में भी कई जगहों पर छापा मारा। एनआईए की रिलीज के मुताबिक जम्मू-कश्मीर कोलिशन ऑफ सिविल सोसाइटी के संचालक खुर्रम परवेज, उनके सहयोगी अहमद बुखारी, परवेज अहमद मट्टा और स्वाति शेषादरी के ठिकानों पर छापा मारा गया। इसके अलावा असोसिएशन ऑफ पैरंट्स ऑफ डिसअपेयर्ड पर्सन की अध्यक्ष परवीना अहंगर और ग्रेटर कैलाश ट्रस्ट के ऑफिस में भी रेड पड़ी।


इन छापों के बाद पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती भड़क गईं। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और ग्रेटर कश्मीर ऑफिस पर रेड अभिव्यक्ति की आजादी दबाने के सरकार के प्रयास का ही नमूना है। दुखद है कि एनआईए बीजेपी की पालतू एजेंसी बन गई है और जो लोग बीजेपी की नहीं मानते उनको परेशान करने की कोशिश करती है।’ महबूबा ने एक और ट्वीट में कहा कि सरकार चाहती है कि मीडिया योग व सेहत की चर्चा करे और जम्मू-कश्मीर के लोगों की जमीन और संसाधनों पर बात न हो।

यह बोलकर मुफ्ती केंद्र सरकार के उस फैसले की तरफ संकेत कर रही थीं जिसके तहत देश के किसी भी राज्य का शख्स जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है। पहले ऐसा संभव नहीं था। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद महबूबा मुफ्ती नजरबंद थीं और जल्द ही रिहा हुई हैं। इसके बाद वह नैशनल कॉन्फ्रेंस के साथ मिलकर सरकार का विरोध करने प्रयास कर रही हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में उन्होंने गुपकार डेक्लेरेशन ग्रुप बनाया है।

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