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आईएस में शामिल होने तुर्की पहुंचे कश्मीरी युवक को भेजा गया वापस

परवेज अपने पिता के साथ कहासुनी के बाद घर छोड़कर चला गया था। उसके पिता चाहते थे कि वह कॉलेज जाए जबकि बेटे की दिलचस्पी धार्मिक अध्ययन में थी।

Author श्रीनगर | Updated: May 30, 2017 8:57 AM
इस्लामिक स्टेट के आतंकी। (फाइल फोटो)

आतंकवादी समूह आइएस में कथित तौर पर शामिल होने का प्रयास कर रहे 21 वर्षीय एक कश्मीरी युवक को तुर्की से भारत भेज दिया गया है। तुर्की के अधिकारियों ने उसे पकड़ा था। आधिकारिक सूत्रों ने यहां बताया कि श्रीनगर निवासी अफशां परवेज को तुर्की की राजधानी अंकारा से 25 मई को भारत के लिए भेजा गया और दिल्ली में सुरक्षा एजंसियां उसे एक अज्ञात स्थान पर ले गईं। उन्होंने बताया कि उससे विभिन्न सुरक्षा एजंसियां पूछताछ कर रही हैं।
सूत्रों ने बताया कि परवेज अपने पिता के साथ कहासुनी के बाद घर छोड़कर चला गया था। उसके पिता चाहते थे कि वह कॉलेज जाए जबकि बेटे की दिलचस्पी धार्मिक अध्ययन में थी। उन्होंने बताया कि उसने 23 मार्च को तेहरान की उड़ान के लिए अपनी सीट बुक की। वह यूरोप में धार्मिक अध्ययन के अवसर तलाशने के बाद नौ अप्रैल को दिल्ली लौटने वाला था। सूत्रों ने बताया कि कश्मीरी युवक ने अपने परिवार को बताने के लिए वस्तुत: एक संदेश भेजा कि वह कुछ ‘समस्याओं’ का सामना कर रहा है।

पिछले दो महीने में तुर्की से वापस भेजा जाने वाला वह दूसरा व्यक्ति है। उन्होंने बताया कि जब पुलिस और कश्मीर में अन्य एजंसियों को इस बारे में सूचित किया गया तो उसका पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई। सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा एजंसियां तब उसके ईरानी समकक्षों के संपर्क में आईं। उन्होंने पाया कि परवेज अंकारा जा रहा था।उन्होंने बताया कि अंकारा में अधिकारियों से संपर्क किया गया और उसे उस वक्त पकड़ा गया जब वह तुर्की की राजधानी में एक बस में यात्रा कर रहा था। सूत्रों ने बताया कि उसे तुर्की के टर्किश एयरलाइंस की एक उड़ान से 25 मई को भारत भेजा गया।उन्होंने बताया कि मार्च में श्रीनगर निवासी मोहम्मद ताहा को तुर्की से भारत वापस भेजा गया था। उसे एहतियातन हिरासत में रखा गया है। भारत में सुरक्षा एजंसियों ने उनकी आइएस में शामिल होने की कथित योजनाओं को चिंता के साथ देखा है। उनका मानना है कि इंटरनेट पर आइएस द्वारा साझा की जा रही प्रचार सामग्री से ‘जिहादी’ कुछ कश्मीरी युवकों का चरमपंथीकरण कर रहे हैं। एजंसियां महसूस करती हैं कि अगर आइएसआइएस के बढ़ते प्रभाव को नहीं रोका गया तो यह घाटी में हालात के लिए नुकसानदेह होगा।

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