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घाटी में अलगाववादी ने बुलाया बंद, कश्मीर में फिर थमा आम जीवन

कश्मीर में पिछले सप्ताहंत को छोड़कर पिछले 140 दिनों से बंद की स्थिति बनी हुई है।
Author श्रीनगर | November 25, 2016 19:06 pm
कश्मीर के बारीपोरा सैन्य प्रतिष्ठान के समीप एक महिला लोहे के गोलाकार अवरोधक को बीच से पार करती हुई। यह इलाका भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर को अलग करने वाली सीमा रेखा के नज़दीक है। (AP Photo/Mukhtar Khan/21 Sep, 2016)

कश्मीर में अलगाववादियों द्वारा आहूत बंद के कारण शुक्रवार (25 नवंबर) को सामान्य जनजीवन बाधित रहा। इसके चलते लोगों की आवाजाही में कमी आई और सड़कों पर भी वाहन कम संख्या में नजर आए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार की नमाज के बाद कानून एवं व्यवस्था की समस्या की आशंका के मद्देनजर आज (शुक्रवार, 25 नवंबर) लोगों का आगमन और वाहनों की आवाजाही अन्य दिनों की तुलना में काफी कम रही। उन्होंने बताया कि जम्मू और कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में अधिकतर दुकानें, पेट्रोल पंप और व्यवसायिक प्रतिष्ठान हड़ताल के कारण बंद रहे, वहीं सार्वजनिक वाहन भी सड़कों पर कम नजर आए। अधिकारी ने बताया कि हालांकि सिविल लाइन के कुछ इलाकों और शहर की बाहरी सीमा पर आज कुछ दुकानें खुली लेकिन लाल चौक सिटी सेंट्र से टीआरसी चौक-बटमालू चौक पर कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानें लगाई। उन्होंने बताया कि घाटी के अन्य जिला मुख्यालयों से भी कम यातायात और अधिकतर दुकानों के बंद रहने की रिपोर्ट मिली है।

कश्मीर में पिछले सप्ताहंत को छोड़कर पिछले 140 दिनों से बंद की स्थिति बनी हुई है। हिजबुल मुजाहिदीन के चरमपंथी बुरहान वानी के आठ जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारे जाने के बाद से ही बंद का नेतृत्व कर रहे अलगाववादी गुट सप्ताह भर का विरोध-कार्यक्रम जारी करते हैं। फिलहाल उन्होंने बंद को एक दिसंबर तक बढ़ा दिया है और पिछले सप्ताहंत की तरह इस सप्ताहंत पर भी पूरे दो दिन बंद में ढील का ऐलान किया है। घाटी में जारी झड़पों में अभी तक दो पुलिस कर्मियों समेत 86 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। सुरक्षा बलों के भी करीब 5,000 कर्मी घायल हुए हैं।

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