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जम्मू कश्मीर: हिंसा में मारे गए लोगों के लिए पुलिस ने जताया दुख, कहा- अपने समाज के युवाओं को नहीं मारना चाहते

हिंसक भीड़ ने घाटी में कई स्थानों पर पुलिस तथा अर्द्धसैनिक बलों के प्रतिष्ठानों पर हमला किया और तीन पुलिस प्रतिष्ठानों सहित कई इमारतों को आग के हवाले किया।

Author श्रीनगर | July 11, 2016 2:37 PM
श्रीनगर में कर्फ्यू के दौरान तैनात पुलिस। (पीटीआई फाइल फोटो)

कश्मीर में आतंकवादी कमांडर बुरहान वानी को मार गिराए जाने के बाद भीड़ की हिंसा और झड़पों में शनिवार (9 जुलाई) को दस लोगों की मौत हो गई जबकि सुरक्षा बलों के 96 जवानों सहित 126 लोग घायल हुए। अधिकारियों ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए हैं और मोबाइल इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी है। वहीं जम्मू कश्मीर पुलिस के एडीजीपी (सीआईडी) एसएम सहा ने घाटी में हिंसक झड़पों में युवाओं मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि हम हमारे अपने समाज के युवाओं को मार गिराना नहीं चाहते। हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी संगठन का ‘पोस्टर ब्वॉय’ बुरहान का उसके पैतृक स्थल त्राल में अंतिम संस्कार किया गया।

हिंसक भीड़ ने घाटी में कई स्थानों पर पुलिस तथा अर्द्धसैनिक बलों के प्रतिष्ठानों पर हमला किया और तीन पुलिस प्रतिष्ठानों सहित कई इमारतों को आग के हवाले किया। इस वजह से तीन पुलिसकर्मी लापता हैं। त्राल में बुरहान के अंतिम संस्कार में हजारों लोग एकत्र हुए। अंतिम संस्कार में भाग लेने आने वाले लोगों से टकराव से बचने के लिए त्राल और इसके आस पास के क्षेत्रों में सुरक्षाबलों की कोई तैनाती नहीं की गई।

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जम्मू कश्मीर पुलिस के एडीजीपी (सीआईडी) एसएम सहाय ने कहा, ‘हमारा आज (शनिवार, 9 जुलाई) का दिन बहुत मुश्किल रहा।’ उन्होंने स्थिति ‘कुछ इलाकों में खराब’, उत्तरी कश्मीर जैसे क्षेत्रों में ‘गंभीर नहीं’ और श्रीनगर में नियंत्रण में बताई। घाटी के कई स्थानों पर बुरहान की मौत के अगले दिन से हिंसक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में आठ लोग मारे गए हैं। सहाय ने कहा कि इनमें से सात की मौत सुरक्षाबलों की ‘जवाबी’ कार्रवाई में हुई जबकि एक न्यक्ति की मौत डूबने से हुई। सहाय ने कहा कि पुलवामा के जिला पुलिस लाइंस पर भी आतंकी हमला हुआ जिसे सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने संगम, लारनू, सीर, गोपालपुरा में शिविरों तथा माटन, कोकेरनाग, दूरू और जंगलत मंडी अल्पसंख्यक शिविरों पर भी हमले किए।

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सहाय ने स्थिति पर संवाददाता सम्मेलन करते हुए कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि झड़पों में युवाओं की जानें जा रही हैं।’ उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों को इन प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकने की अपील की ताकि युवाओं की जानें नहीं जाएं। मार गिराने के बजाय बुरहान को जिंदा क्यों नहीं पकड़ा गया, जैसे कई सवालों के जवाब में सहाय ने कहा कि हम निश्चित रूप से हमारे अपने समाज के युवाओं को मार गिराना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि हिजबुल कमांडर और दो अन्य को उस समय मार गिराया गया जब सुरक्षा बलों ने एक घर में छिपकर तीन लोगों द्वारा गोलियां चलाने के बाद जवाबी कार्रवाई की। दो सुरक्षाकर्मी इस गोलीबारी में घायल हुए थे।

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सहाय ने कहा, ‘आज (शनिवार, 9 जुलाई) अंतिम संस्कार एक मुद्दा बन गया और अंतिम संस्कार की पृष्ठभूमि में कई स्थानों विशेषकर सुरक्षाबल प्रतिष्ठानों, पुलिस थानों अन्य सरकारी इमारतों, नेताओं के घरों, सेना के शिविरों सहित विभिन्न स्थानों पर हमले के प्रयास हुए।’ उन्होंने कहा कि कई अलग अलग स्थानों पर हमले हुए जिससे स्थिति बहुत गंभीर हो गई। इन घटनाओं में दस लोगों की मौत हुई। सहाय ने कहा कि 96 सुरक्षाकर्मी और करीब 30 आम नागरिक झड़पों में घायल हुए।

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