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कश्मीर के कुछ हिस्सों में पटरी पर लौट रहा है जीवन, घाटी में मरनेवालों की संख्या 86 हुई

सुरक्षाबलों के हाथों जुलाई में हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में गुरुवार को 132वें दिन भी जनजीवन प्रभावित रहा।

Author श्रीनगर | November 17, 2016 16:47 pm
शनिवार (13 अगस्त) को श्रीनगर में कर्फ्यू के दौरान तैनात सेना का एक जवान। (पीटीआई फाइल फोटो)

श्रीनगर के कुछ हिस्सों में गुरुवार (17 नवंबर) को कुछ दुकानें खुलीं और कुछ सार्वजनिक वाहन भी चलते दिखाई दिए। इस बीच नोटबंदी के चलते यहां के बैंकों में भारी भीड़ लगी रही। दो सप्ताह पहले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई में घायल एक बुजुर्ग की यहां अस्पताल में मौत होने से कश्मीर में हालिया हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 86 पर पहुंच गयी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि दो नवंबर को सौरा के अंचर इलाके में 70 वर्षीय गुलाम मोहम्मद खान सुरक्षाबलों की कार्रवाई में घायल हो गए थे। गुरुवार सुबह अस्पताल में उनकी मौत हो गई। सुरक्षाबलों के हाथों जुलाई में हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में गुरुवार को 132वें दिन भी जनजीवन प्रभावित रहा।

अधिकारियों ने बताया कि अलगाववादियों की हड़ताल के आह्वान के कारण श्रीनगर और अन्य जिला मुख्यालयों की दुकानें, पेट्रोल पंप और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। उन्होंने बताया कि इस समय सालाना बोर्ड परीक्षाएं हो रही हैं, जबकि अशांति के कारण यहां के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पठन पाठन का काम प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि घाटी में सार्वजनिक वाहन सड़कों पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सिविल लाइंस और शहर के बाहरी इलाकों तथा घाटी के कुछ अन्य कस्बों में सार्वजनिक वाहनों की आवाजाही देखी गयी। उन्होंने बताया कि इन इलाकों में कुछ दुकानें भी खुली रहीं। इसके अलावा श्रीनगर से घाटी के अन्य हिस्सों के बीच चलने वाली अन्तर जिला टैक्सियां भी चलती नजर आईं।

उन्होंने बताया कि टीआरसी चौक-बटमालू से शहर के मध्य भाग में स्थित लाल चौक तक जाने वाले रास्तों में बहुत से दुकानदारों ने अपनी दुकाने लगाईं। इसके अलावा पूरी घाटी के बैंक भी खुले रहे और यहां भारी भीड़ रही। वानी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले अलगाववादियों ने शनिवार और रविवार को अपना विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की है। आठ जुलाई के बाद पहली बार पूरे दिन के लिए विरोध कार्यक्रम रोका गया है।

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