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जम्मू-कश्मीर: स्कूलों को आग से बचाने के लिए सरकार ने जारी किए निर्देश- रात में स्कूल की सुरक्षा करें टीचर्स

यहां के 1,015 स्कूलों को यह निर्देश जारी किए थे। इसके मुताबिक, "चौकीदार हर समय उपलब्ध हो, यदि चौकीदार नहीं है तो सिक्योरिटी की जिम्मेदारी स्कूल के किसी स्टाफ मेंबर को सौंपी जाए।"

Author November 8, 2016 8:19 AM
बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में शुरू हुई हिंसा में अब तक 29 स्कूलों को आग के हवाले किया जा चुका है। (Photo: AP/File)

कश्मीर में 8 जुलाई को हिजबुल मुजाहिद्दीन कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में शुरू हुई हिंसा में अब तक 29 स्कूलों को आग के हवाले किया जा चुका है। अब इस तरह की घटनाओं से स्कूल को बचाने के लिए सरकार ने टीचर्स से अपने स्कूल की सुरक्षा करने को कहा है। दिए गए आदेश के मुताबिक, स्कूल टीचर्स को रात में भी अपने स्कूल की सुरक्षा करनी होगी। यह निर्देश घाटी के सभी स्कूलों में जारी कर दिए गए हैं और शिक्षकों का कहना है कि इस निर्देश के अनुसार स्कूल की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी गई है। इस तरह का निर्देश जारी करने वाले श्रीनगर के चीफ एजुकेशन ऑफिसर (CEO) आरिफ इकबाल मलिक ने बताया कि कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर बशीर खान के नेतृत्व में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद यह फैसला लिया गया है। हालांकि बशीर खान ने इसपर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया।

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आरिफ इकबाल मलिक ने एक नवंबर को यहां के 1,015 स्कूलों को यह निर्देश जारी किए थे। इसके मुताबिक, “चौकीदार हर समय उपलब्ध हो, यदि चौकीदार नहीं है तो सिक्योरिटी की जिम्मेदारी स्कूल के किसी स्टाफ मेंबर को सौंपी जाए।” मलिक ने हमारे सहयोगी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मीटिंग में यह फैसला लिया गया था कि जिन स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी (जिसमें चौकीदार भी आते हैं) के कर्मचारी नहीं है, वहां की देखरेख टीचर्स करेंगे।” कश्मीर में रात के लिए 20 फीसदी से भी कम स्कूलों में चौकीदार मौजूद है। चौकीदार की जिम्मेदारी दिए जाने के सरकार के इस फैसले से अधिकतर स्कूलों के शिक्षक काफी नाराज हैं।

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राफियाबाद स्कूल के हेडमास्टर ने बताया, यहां तक कि महिलाओं को भी इस निर्देश में राहत नहीं दी गई है। महिलाओं को कहा गया है कि अगर वह रात में नहीं आ सकती तो अपनी जगह परिवार के किसी पुरुष को भेज सकती है। डांगीवाचा के गवर्मेंट मिडल स्कूल के टीचर फारूक अहमद ने कहा, “मैं तीन रातों से लगातार स्कूल जा रहा हूं। हमारे जोनल एजुकेशन ऑफिसर ने एक साप्ताहिक सूची जारी की है। इसमें शिक्षकों के नाम और रात में उनकी ड्यूटी लिखी है। इस पूरे हफ्ते मुझे नाइट ड्यूटी करनी है।” जम्मू-कश्मीर के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने बताया कि “शिक्षा विभाग ने इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया है। ऐसा स्थानीय स्तर पर किया जा रहा होगा।” हालांकि शिक्षक वर्ग का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में रात की ड्यूटी करना कितना खरतनाक है। अगर हमें कुछ हो जाता है तो कौन हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगा।

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