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J&K: जुलूस निकालने की अलगाववादियों की कोशिश नाकाम, नज़रबंद किए गए मीरवाइज-गिलानी

मीरवाइज ने गिरफ्तारी से पहले कहा, 'जनमत संग्रह कराने का उनके (केंद्र सरकार के) पास बड़ा अवसर है और देखें कि कश्मीर के लोग क्या चाहते हैं।’

Author श्रीनगर | August 13, 2016 9:35 PM
शनिवार (13 अगस्त) को श्रीनगर में कर्फ्यू के दौरान तैनात सेना का एक जवान। (पीटीआई फाइल फोटो)

पुलिस ने अलगाववादी नेताओं मीरवाइज उमर फारूक और सैयद अली शाह गिलानी द्वारा अपने आवास से लाल चौक तक जुलूस निकालने के प्रयास को विफल कर दिया। दोनों नेता नजरबंद हैं। पहले मामले में उदारवादी हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज श्रीनगर के बाहरी इलाके में निगीन स्थित अपने आवास से आज (शनिवार, 13 अगस्त) दोपहर जैसे ही बाहर निकले पुलिस ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस उन्हें निगीन थाने ले गई।

दूसरी तरफ हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता गिलानी ने भी श्रीनगर-हवाई अड्डा मार्ग स्थित अपने आवास से मार्च निकालने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने अस्सी वर्षीय नेता को रोक लिया जिसके बाद वह अपने समर्थकों के साथ लिंक रोड पर धरने पर बैठ गए। अधिकारियों ने बताया कि धरना करीब आधे घंटे तक चला और शांतिपूर्ण तरीके से खत्म हुआ।

दोनों हुर्रियत नेताओं और यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जेकेएलएफ ने आज (शनिवार, 13 अगस्त) और कल (रविवार, 14 अगस्त) के लिए ‘लाल चौक मार्च’ का आह्वान किया है ताकि संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के मुताबिक ‘आत्मनिर्णय के अधिकार’ का दबाव बना सकें। मीरवाइज और गिलानी जहां नजरबंद हैं वहीं मलिक नौ जुलाई से ही यहां के केंद्रीय कारागार में बंद हैं। हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हुई व्यापक हिंसा को लेकर उन्हें नौ जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया था।

गिरफ्तारी से पहले मीरवाइज ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि घाटी में ‘जमीनी हकीकत पर पर्दा डालकर’ वह देश के लोगों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर रही है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘वे दावा कर रहे हैं कि कुछ लोग गुमराह हैं। अगर ऐसा मामला है तो जनमत संग्रह कराने का उनके पास बड़ा अवसर है और देखें कि कश्मीर के लोग क्या चाहते हैं।’

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