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समाज के अंदर बंदूक घुसती जा रही है तो ‘आजादी’ का मतलब खत्म रहा है: महबूबा मुफ्ती

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर अशांति 'पूर्व योजना' थी, मुट्ठी भर लोग शामिल हैं।

Author जम्मू | August 23, 2016 6:26 AM
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती। (पीटीआई फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार (22 अगस्त) कहा कि कश्मीर में अशांति ‘पूर्व नियोजित योजना’ है और ‘मुट्ठी भर लोग’ घाटी में अशांति फैलाए हुए हैं जबकि 95 फीसदी लोग अमन पसंद हैं और पांच फीसदी लोगों की गलती का खामियाजा उन्हें नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने दुख जताया कि ‘निहित स्वार्थ’ वाले लोग बच्चों को अपनी ढाल बना रहे हैं जबकि सुरक्षा बलों के शिविर और चौकियों पर हमला कर उन्हें भड़का रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप बच्चे मारे जा रहे हैं। महबूबा ने ‘आजादी के समर्थन’ में नारे लगाने वालों के खिलाफ संदेश देते हुए उनसे कहा कि पाकिस्तान, सीरिया, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे इस्लामिक देशों में मुस्लिमों की स्थिति को देखिए जबकि इन देशों में ‘स्वतंत्रता’ है। उन्होंने कहा कि जब समाज के अंदर बंदूक घुसती जा रही है तो ‘आजादी’ का मतलब खत्म होता जा रहा है।

उन्होंने सोमवार (22 अगस्त) को यहां एक सार्वजनिक सभा में कहा, ‘मैं कहती रही हूं कि बंदूक से किसी समस्या का समाधान नहीं होगा। पत्थर भी किसी समस्या का समाधान नहीं कर सकता।’ उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई शिकायत है तो इस पर आगे आकर बात करनी चाहिए। महबूबा ने कहा कि ईद के बाद कई विकास कार्यक्रमों को शुरू करने की उनकी योजना थी। उन्होंने कहा कि अशांति ‘पूर्व नियोजित योजना’ थी और ‘निहित स्वार्थ वाले’ लोग अशांति फैलाना चाह रहे थे। महबूबा ने कहा, ‘मुझे नहीं समझ आ रहा कि क्या हुआ, लोग अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर में जब भी स्थिति कुछ ठीक होती है तो पर्यटन शुरू होता है, काम शुरू होता है, और तब कुछ न कुछ ऐसा होता है जिससे सामान्य कामकाज बाधित होता है।’

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