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कश्मीर: सेना ने शुरू किया ‘स्कूल चलो’ अभियान

दक्षिण कश्मीर में ‘आपरेशन काम डाउन’ के बाद सेना अब अन्य अभियान ‘स्कूल चलो’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
Author अवंतीपुरा | November 7, 2016 06:34 am
पिछले दिनों घाटी में फैली हिंसा में जलाया गया कश्मीरी स्कूल। (फाइल फोटो)

दक्षिण कश्मीर में ‘आपरेशन काम डाउन’ के बाद सेना अब अन्य अभियान ‘स्कूल चलो’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसके तहत वह इलाकों की पहचान करती है और विद्यार्थियों को नि:शुल्क कोचिंग उपलब्ध कराती है। साथ ही वह विद्यार्थियों को पाठ्येत्तर गतिविधियों में शामिल कर रही है।
मेजर जनरल अशोक नरूला का कहना है, ‘हमें पता है कि हमें आंतरिक मोर्चे पर स्थिति से निपटना है और हम अपेक्षित नतीजों के साथ यह कर रहे हैं। लेकिन साथ ही स्थानीय लोगों के साथ मेरी बातचीत के दौरान मैंने महसूस किया कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान हैं और साथ ही अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतिति भी।’ ‘विक्टर फोर्स’ के जनरल-आफिसर-इन-कमांड नरूला ने कहा, ‘यही वह क्षेत्र है जहां मैंने अपने लोगों को विद्यार्थियों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए योजना पर काम करने को कहा।’

सेना ने न्यूनतम बल का इस्तेमाल करते हुए घाटी के विभिन्न हिस्सों से आतंकियों और प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए अगस्त-सितंबर में ‘आपरेशन काम डाउन’ शुरू किया था। करीब पांच महीने से शैक्षणिक संस्थान बंद हैं और पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान 30 से अधिक स्कूल जलाए गए। ऐसे में जनरल नरूला के निर्देशों पर ‘स्कूल चलो’ कार्यक्रम घाटी में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। नरूला की कमान के तहत विभिन्न इकाइयों ने इलाकों में अध्यापकों की पहचान करनी शुरू की है और वे स्कूलों या सामुदायिक आवासों में कक्षाएं चलाने का उनसे अनुरोध कर रहे हैं।

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नरूला ने कहा, ‘सेना का एक अधिकारी होने के अलावा मैं दो बच्चों का पिता हूं। इसलिए मैंने यहां सेना के अधिकारी के बजाय एक पिता का नजरिया अपनाया और यह सुनिश्चित किया कि इन बच्चों के हाथों में पत्थर के बजाय उनकी किताबें होनी चाहिए।’ एक स्थानीय नारा ‘छयेम ने जरूरत दौलत-ओ-रुबाब, फकत गोछुम स्कूल ते किताब (मुझे पैसे या शोहरत की जरूरत नहीं, बल्कि किताबों और स्कूल की जरूरत है) का इस्तेमाल करते हुए सेना के ये अधिकारी और कर्मी एक अलग किस्म का काम कर रहे हैं। वे अभिवावकों को अपने बच्चों को इस अभियान से जोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

 

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