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RTI का खुलासा: सेना के पास नहीं है 2016 से पहले सर्जिकल स्ट्राइक होने का कोई रिकॉर्ड

पिछले साल 28-29 सितंबर की दरमियानी रात को भारतीय सेना ने एलओसी पार करके आतंकी ठिकानों पर लक्षित हमले किए थे जिनमें पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को बहुत नुकसान हुआ थ।

Author नई दिल्ली | August 28, 2017 3:02 AM
कश्‍मीर घाटी में सेना के जवान। (FILE PHOTO: PTI)

सेना के सैन्य अभियान महानिदेशालय (डीजीएमओ) के पास 29 सितंबर, 2016 से पहले हुई किसी भी लक्षित हमले का कोई रिकार्ड नहीं है। एक आरटीआइ अर्जी के जवाब में रक्षा मंत्रालय (सेना) की एकीकृत मुख्यालय में डीजीएमओ ने कहा कि 29 सितंबर, 2016 को एक लक्षित हमला किया गया था। जवाब में कहा गया है कि अगर इससे पहले कोई लक्षित हमला किया भी गया हो तो इस प्रकोष्ठ के पास अन्य किसी ऐसे हमले का रिकार्ड नहीं है। इसमें कहा गया कि डीजीएमओ ने संवाददाता सम्मेलन में इस पर बयान जारी किया था।

रक्षा मंत्रालय में आरटीआई अर्जी दाखिल कर भारतीय सेना के रिकार्ड में दर्ज ‘लक्षित हमले’ की परिभाषा भी पूछी गई थी। डीजीएमओ ने जवाब में कहा कि ‘खुले स्रोत’ में उपलब्ध जानकारी के अनुसार ‘लक्षित हमले’ की परिभाषा है, ‘ऐसा अभियान जो विशेष खुफिया सूचना पर आधारित है, अधिकतम प्रभाव से किसी वैध सैन्य लक्ष्य पर केंद्रित होता है और जिसमें इस पक्ष का न्यूनतम नुकसान होता है या बिल्कुल नुकसान नहीं होता है। इसमें सोचे-समझे तरीके से लक्षित क्षेत्र में प्रवेश किया जाता है, बिल्कुल सटीक तरीके से कार्रवाई की जाती है और तेजी से जवानों के शव वापस बेस में लाए जाते हैं।’

आवेदन में रक्षा मंत्रालय से यह भी पूछा गया कि 29 सितंबर, 2016 के डीजीएमओ के बयान में जिस ‘लक्षित हमले’ का उल्लेख है, वह भारतीय सेना के इतिहास में पहला ऐसा लक्षित हमला था। यह भी पूछा गया कि क्या सेना ने 2004 से 2014 के बीच लक्षित हमला किया था। मंत्रालय ने आरटीआई अर्जी को एकीकृत मुख्यालय (सेना) को भेज दिया जिसने डीजीएमओ से सूचना मांगी। डीजीएमओ ने जो जवाब दिए उन्हें एकीकृत मुख्यालय (सेना) ने आवेदक को भेजा। पिछले साल 28-29 सितंबर की दरमियानी रात को भारतीय सेना ने एलओसी पार करके आतंकी ठिकानों पर लक्षित हमले किए थे जिनमें पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को बहुत नुकसान हुआ था।

 

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