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गृह मंत्रालय ने भेजी एनएसए को रिपोर्ट- कश्मीर में हालात सही करने के लिए मस्जिद, मदरसा और मीडिया पर रखना होगा नियंत्रण

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को जम्मू-कश्मीर मीडिया द्वारा विद्रोहियों का समर्थन किए जाने से रोकना होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो भी घाटी में भारत विरोधी घटनाओं को अंजाम देता है ऐसी घटनाओं का समर्थन करते हुए किसी भी प्रकार का प्रसारण नहीं किया जाना चाहिए।

कश्मीर घाटी में हालात को काबू करने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा एक नया कदम उठाया गया है। गृह मंत्रालय का कहना है कि घाटी में हालात पर काबू रखने के लिए सबसे पहले मस्जिद, मदरसों और मीडिया पर नियंत्रण रखना होगा। गृह मंत्रालय नें इन सबपर नियंत्रण रखने के लिए एनएसए को रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट के तथ्यों को कश्मीर से लिया गया है। गृह मंत्रालय द्वारा एनएसए को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि राजनीतिक माहौल में बदलाव हुआ है, खुफिया जानकारी इधर से उधर की जा रही है और हुरर्रियत एक मोडरेट समुदाय है जो कि इस तक पहुंचा है। आपको बता दें कि दो दिन पहले जम्मू-कश्मीर के शौपियां में हुए आतंकी हमले में 3 जवान शहीद हो गए थे और एक स्थानीय निवासी की भी मृत्यु हो गई थी।

पिछले तीन दशकों से घाटी में हो रहे विद्रोह की चर्चा करते हुए सरकार ने फैसला किया है कि घाटी में राजनीतिक माहौल को अब बदलना पड़ेगा और 2014 में जो भी चुनावी जीत का हिस्सा थे उन्हें सरकार के इस फैसले का समर्थन करना चाहिए। इस रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि केंद्र द्वारा कुछ आर्थिक योजनाओं को लागू किया जा सकता है जिससे कि घाटी के प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे लोगों की मदद की जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि मस्जिदों और मदरसों की गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को जम्मू-कश्मीर मीडिया द्वारा विद्रोहियों का समर्थन किए जाने से रोकना होगा। टीवी चैनल और न्यजपेपर अपने एंटी इंडिया धारणा पर प्रोग्राम प्रसारित करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जो भी घाटी में भारत विरोधी घटनाओं को अंजाम देता है, ऐसी घटनाओं का समर्थन करते हुए किसी भी प्रकार का प्रसारण नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों द्वार सेना पर पत्थरबाजी की जाती है, ऐसी घटनाओं को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत पहली बार किसी अपराध में शामिल खासकर टीनएजर्स को स्पेशल जुवेनाइल होम में भेजा जाएगा जिससे कि वे किसी के प्रभाव में आकर फिर से ऐसी घटनाओं में शामिल न हो सकें। इसके साथ ही इस रिपोर्ट में घाटी में बेरोजगारी पर भी चर्चा की गई है।

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