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हफ्ते में पांच दिन बढ़ई का काम, बाकी दो दिन जिंदगियां बदलते हैं ‘पीर साहब’

शेख ने पीटीआई को बताया, ‘‘एक तावीज उनकी मदद के लिये संभवत: उतना मददगार नहीं हो सकता है।’’
Author August 14, 2017 14:37 pm
‘जम्मू एंड कश्मीर आरटीआई मूवमेंट’ के संस्थापक शेख गुलाम रसूल हर हफ्ते 30 आरटीआई कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करते हैं। (संकेतात्मक तस्वीर)

जम्मू कश्मीर में बडगाम के रहने वाले 45 वर्षीय गुलाम मोहिउद्दीन शेख यूं तो हफ्ते के पांच दिन बढ़ई का काम करते हैं, लेकिन सप्ताह के अंत में वह अपना चोला बदल लेते हैं और लोगों के जीवन में बदलाव लाने का कार्य करते हैं। सप्ताहांत में लोगों की समस्याओं को अपने तरीके से दूर करने वाले शेख को अब लोगों की समस्याएं सुलझाने का नया तरीका मिल गया है। आम तौर पर ‘पीर साहब’ के नाम से मशहूर शेख लोगों को तावीज देकर उनकी समस्याएं सुलझाने का दावा करते हैं लेकिन इसके अलावा वह आवश्यकता पड़ने पर सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत आवेदन भी दायर करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लोग मेरे पास सेहत, शिक्षा, रोजगार, अन्य निजी समेत तमाम समस्याएं लेकर आते हैं और इनके समाधान के लिये मैं उन्हें तावीज देता हूं। लेकिन इन समस्याओं के अलावा उनके पास राशन, बीपीएल राशन कार्ड प्राप्त करने और ऐसे ही तमाम लाभ नहीं मिलने से संबद्ध प्रशासनिक शिकायतें भी होती हैं।’’

ऐसी समस्याओं के लिये वह विकास कार्य, केंद्र या राज्य सरकार की योजनाओं अथवा कल्याण कोष अनुदानों के तहत मिलने वाले लाभों के मद में लोगों की समस्याओं को संबोधित करते हुए एक आरटीआई दायर करते हैं। शेख ने पीटीआई को बताया, ‘‘एक तावीज उनकी मदद के लिये संभवत: उतना मददगार नहीं हो सकता है।’’

इसके बाद शेख यही सोचते कि आखिर लोगों की समस्याएं सुलझाने के लिये वह ऐसा क्या करें। फिर राज्य में आरटीआई जागरुकता के लिये काम करने वाले संगठन ‘जम्मू एंड कश्मीर आरटीआई मूवमेंट’ के संस्थापक शेख गुलाम रसूल के साथ वर्ष 2006 में मुलाकात के बाद उन्होंने आरटीआई की भूमिका के बारे में सुना। शेख ने बताया, ‘‘उन्होंने मेरे अनुयायियों की मदद और जिले में भ्रष्टाचार उजागर करने के लिये मुझे आरटीआई मूवमेंट में शामिल होने के लिये कहा क्योंकि उन्होंने कई लोगों के ऊपर मेरा प्रभाव देखा था।’’

शेख ने बताया कि वह हर सप्ताह करीब 30 आरटीआई कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘आरटीआई अब मेरा नया तावीज बन गया है और मेरे पास प्रशासनिक मुद्दों के साथ आने वाले लोगों को मैं यह नया उपाय बताता हूं।’’ रसूल भी शेख को कश्मीर का एक अग्रणी आरटीआई कार्यकर्ता बताते हैं जिन्होंने घाटी में इसे जमीनी स्तर की क्रांति में बदल दिया है।

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