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भारतीय सेना ने कहा- कश्‍मीर में घुसपैठियों को ‘कवर फायर’ दे रही है पाकिस्‍तानी सेना

सेना ने पाकिस्तानी सेना पर एलओसी पर आतंकी गुटों को घुसपैठ कराने के लिए भारी गोलीबारी से कवच प्रदान करने का दोष मढ़ा।

Author June 8, 2017 9:30 PM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (File Photo)

सेना ने गुरुवार (8 जून) को पाकिस्तानी सेना पर कश्मीर में सशस्त्र आतंकियों का घुसपैठ कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन गुटों को नियंत्रण रेखा पर उनके घुसपैठ के दौरान गोलीबारी से कवच सहित सक्रिय समर्थन दिया जा रहा है। उत्तरी कमान के रक्षा प्रवक्ता ने आज यहां कहा, ‘‘जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा के करीब तैनात भारतीय सेना की टुकड़ियां हथियारों से लैस घुसपैठियों को एलओसी पार कराने की पाकिस्तानी सेना की विभिन्न कोशिशों को नाकाम कर चुकी है।’’

उन्होंने कहा कि पिछले 48 घंटे में गुरेज, माछिल, नौगाम और उरी सेक्टरों में घुसपैठ के प्रयासों को नाकाम किया गया है। अब तक सात सशस्त्र घुसपैठियों को मार गिराया गया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में हथियार, कारतूस और जंग छेड़ने की सामग्री जब्त की गई और माछिल, नौगाम तथा उरी सेक्टरों में अभियान जारी है।

सेना ने पाकिस्तानी सेना पर एलओसी पर आतंकी गुटों को घुसपैठ कराने के लिए भारी गोलीबारी से कवच प्रदान करने का दोष मढ़ा। प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इन सशस्त्र घुसपैठिए गुटों को कश्मीर घाटी में घुसपैठ कराने के लिए एलओसी पर पाकिस्तानी सेना चौकियों से कवच गोलीबारी सहित सक्रिय मदद की जा रही है।’’

घाटी में सेना ने दीवारों के भीतर देखने में सक्षम राडार तैनात किए :-
वहीं भारतीय सेना दीवारों के भीतर या छतों में बनी जगहों में छुपे आतंकवादियों का पता लगाने के लिए कश्मीर घाटी में सक्षम राडार का प्रयोग करेगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सेना ने ऐसी कुछ राडार प्रणाली आयात भी कर ली है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक उग्रवाद-विरोधी अभियानों के दौरान ज्यादा सटीक और प्रभावी साबित होगी। यह सेना को सघन क्षेत्रों में मकानों के भीतर छुपे आतंकवादियों का ठिकाना बताएगी और इससे असैन्य नागरिकों को हताहत होने से भी बचाया जा सकेगा।

उग्रवाद-निरोधी अभियानों से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एक बार से ज्यादा मौकों पर ऐसा हुआ है कि सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह को पुष्ट खुफिया जानकारी के बावजूद आतंकवादियों से निपटे बगैर वापस लौटना पड़ा है। बाद में स्थानीय मुखबिरों ने बताया कि जिस मकान पर छापा मारा गया, आतंकवादी उसी मकान में विशेष रूप से बनाए गए भूमिगत ठिकाने या छत पर बनाई गई फाल्स सीलिंग में छुपे हुए थे।

सूत्रों ने कहा, इन हालात को देखने के बाद दीवारों के भीतर देखने में सक्षम राडार की जरूरत महसूस हुई जो उग्रवाद-विरोधी अभियानों में सुरक्षा बलों के लिए मददगार साबित होंगे, विशेष रूप से ज्यादा भीड़-भाड़ वाले इलाकों में। यह राडार दीवारों या कंक्रीट से बने किसी अन्य ढांचे के पीछे छुपे व्यक्ति के शरीर से निकलने वाली शॉर्ट-इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के आधार पर काम करता है।

एक अधिकारी ने बताया, यह मनुष्य के शरीर से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों में छोटे बदलावों को भी भांप लेता है, जैसे सांस लेने से होने वाला बदलाव भी इसपर दिखता है। उन्होंने कहा, राडार पर उभरने वाले संकेत सेना को छुपे हुए आतंकवादियों की जगह और उनकी गतिविधियों का तुरंत पता बता देंगे। हालांकि सेना ने अभी कुछ ही राडार आयात किये हैं, लेकिन अधिकारियों को विश्वास है कि उपयोगिता का परीक्षण होने के बाद इनकी संख्या भी बढ़ेगी।

दिलचस्प बात यह है कि रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान (डीआरडीओ) की शाखा इलेक्ट्रॉनिक राडार डेवेलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (एलआरडीई) भी इस राडार को स्वदेशी तकनीक से विकसित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि वह अभी भी परीक्षण स्तर में ही है।

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