जम्मू-कश्मीरः रात में मंदिर में जबरदस्ती घुसना चाहता था पुलिसकर्मी, आतंकी समझ मार दी गोली, मौत

मंदिर की सुरक्षा में लगे गार्ड ने पुलिसकर्मी को रोकने का प्रयास किया लेकिन ईयरफोन लगाकर किसी से बात करने की वजह से उसे कुछ सुनाई नही दिया। जिसके बाद गार्ड ने पुलिसकर्मी को गोली मार दी।

Pulwama, Terrorists Encounter
श्रीनगर के पुलवामा में शुक्रवार को गोलीबारी और मुठभेड़ के बाद बख्तरबंद वाहनों से जाते भारतीय सुरक्षा बल। (AP Photo/ Dar Yasin)

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा इलाके में मंदिर के गार्ड ने एक पुलिसकर्मी को आतंकवादी समझकर गोली मार दी। इससे पुलिसकर्मी की मौत हो गई। घटना 21 सितंबर की रात की है जब एक पुलिसकर्मी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। मंदिर की सुरक्षा में मौजूद गार्ड ने उस पुलिसकर्मी को आतंकवादी समझकर गोली चला दी। स्थानीय पुलिस ने घटना की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि गलतफहमी के चलते ऐसा हुआ है।

पुलिसकर्मी की पहचान: उत्तरी कश्मीर के डीआईजी सुरजीत कुमार ने बताया कि मृतक पुलिसकर्मी का नाम अजय धर (41 वर्ष) था। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी ने इलाके के मंदिर में जबरदस्ती प्रवेश करने की कोशिश की थी। वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड ने हरकतों की वजह से पुलिसकर्मी को आतंकवादी समझ लिया था।

घटना की जानकारी मिलते ही घायल पुलिसकर्मी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उसकी जान बचाई नहीं जा सकी। अजय धर ईयरफोन लगाकर किसी से बात करते हुए मंदिर के विश्राम स्थल की तरफ जा रहा था। गार्ड ने उसे रुकने के लिए तो कहा, लेकिन ईयरफोन की वजह से उसे गार्ड की बात सुनाई नहीं दी थी। बार बार बोलने के बाद भी जब अजय नहीं रुका तो गार्ड को लगा कि वह आतंकवादी है।

लगाए हुए था ईयरफोन: अजय धर कान में ईयरफोन लगाकर किसी से बात करते हुए मंदिर के विश्राम स्थल की तरफ जा रहा था। गार्ड ने उसे रुकने के लिए तो कहा लेकिन ईयरफोन की वजह से उसे कुछ सुनाई नही दिया। जिससे गार्ड को लगा कि मंदिर में कोई आतंवादी घुस आया है। ऐसे में उसने पुलिसकर्मी पर गोली चला दी।

इससे पहले भी हुई हैं घटनाएं: जम्मू कश्मीर में अधिकांश मंदिरों की सुरक्षा पुलिस के जिम्मे है। वैसे गलतफहमी के चलते किसी पर गोली चलाने की यह पहली घटना पहली नहीं है। इसके पहले भी केंद्र शासित प्रदेश में इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।

6 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया: जम्मू कश्मीर में आतंकवादी गतिवधियों पर नकेल कसने के लिए जम्मू कश्मीर सरकार की तरफ से लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। 22 सितंबर को आतंकवादियों से संबंध रखने और उनके संगठनों के लिए ओवरग्राउंड वर्कर्स के तौर पर काम करने के आरोप में 6 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। इनमें 2 सिपाही भी शामिल हैं।

वहीं इसके पहले भी इसी साल जुलाई में भी 11 कर्मचारियों को आतंकवादी संबंधों के चलते नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इसमें हिजबुल मुजाहिदीन के कमांडर सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटे भी शामिल थे।

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