आठ को वोटिंग, पर प्रचार तो दूर, इस चुनाव में उम्मीदवारों का नाम तक नहीं हो रहा सार्वजनिक

आतंकी खौफ का आलम यह है कि घाटी के 598 वार्ड की 172 सीटों पर एक भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं हो सका है जबकि 190 सीटों पर मात्र एक-एक उम्मीदवार ही खड़े हैं।

बडगाम जिले की एक पंचायत भवन को आतंकियों ने पिछले हफ्ते आग लगा दी थी। (फोटो-शुएब मसूदी)

जम्मू-कश्मीर नगर निकाय चुनावों के पहले चरण में आठ अक्टूबर को वोटिंग होनी है लेकिन वहां न तो चुनाव प्रचार हो रहा है और न ही उम्मीदवार डोर-टू-डोर कैम्पेन कर रहे हैं। घाटी में चुनाव तो है लेकिन चुनावी फिजा नहीं है। कोई चुनावी रैली भी नहीं हो रही है। यहां तक कि चुनाव में कौन-कौन खड़ा है और उम्मीदवारों का किन-किन राजनीतिक दलों से जुड़ाव है, इसका भी खुलासा नहीं किया जा रहा है। अधिकारी इसके पीछे सुरक्षा कारणों को वजह बताते हैं। अधिकारियों का कहना है कि उम्मीदवारों के नाम का खुलासा करने का मतलब है उनके लिए मुसीबतों को न्यौता देना। सबसे ज्यादा परेशानी दक्षिणी कश्मीर में है। बता दें कि आतंकी संगठनों ने निकाय चुनावों का न सिर्फ बहिष्कार किया है बल्कि चुनाव में भाग लेने वालों को जान से हाथ धोने की धमकी भी दी है। इसी वजह से अधिकारी उम्मीदवारों के नाम का खुलासा नहीं कर रहे हैं ताकि उनकी जान को किसी तरह का कोई नुकसान न पहुंचे।

कश्मीर घाटी के 40 निकायों के 598 वार्ड के लिए कुल 851 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया है। पूरे राज्य यानी जम्मू-कश्मीर की बात करें तो कुल 79 निकायों में कुल 1145 सीट हैं। इन पर कुल 3005 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। राज्य की दो प्रमुख राजनीतिक दल पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेन्स ने निकाय चुनावों का बहिष्कार किया है जबकि बीजेपी, कांग्रेस और सज्जाद लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेन्स चुनावी मैदान में है। पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेन्स ने राज्य में धारा 35ए पर उपजे गतिरोध के विरोध में चुनाव बहिष्कार किया है और केंद्र सरकार से इस पर रुख स्पष्ट करने की मांग की है। माना जा रहा है कि घाटी में करीब 60 फीसदी सीटों पर चुनाव नहीं होंगे।

आतंकी खौफ का आलम यह है कि घाटी के 598 वार्ड की 172 सीटों पर एक भी नामांकन पत्र दाखिल नहीं हो सका है जबकि 190 सीटों पर मात्र एक-एक उम्मीदवार ही खड़े हैं। इन पर उम्मीदवारों का चुनाव बिना चुनाव के यानी निर्विरोध चुना जाना तय है। घाटी के 40 निकायों के 21 सीटों पर भी चुनाव नहीं होंगे जबकि श्रीनगर के 74 वार्ड पर उम्मीदवारों के बीच मुकाबला कड़ा हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक श्रीनगर वार्ड के लिए 310 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किए हैं। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी शालीन कोबरा ने बताया कि नामांकन की अंतिम तारीख के बाद चुनावी प्रक्रियाओं के अनुसार सभी उम्मीदवारों के बारे में जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के बाहर चिपकाना अनिवार्य है लेकिन सुरक्षा कारणों से ऐसा नहीं किया जा रहा है। दक्षिणी कश्मीर के एक रिटर्निंग ऑफिसर ने बताया कि उन्हें उम्मीदवारों की सुरक्षा से समझौता नहीं करने और उम्मीदवारों का विवरण सार्वजनिक नहीं करने का मौखिक आदेश मिला है।

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