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कश्‍मीर में हिंसा से निपटने को गृह मंत्रालय का प्‍लान- सेना में भर्ती होंगे 16 हजार कश्‍मीरी

गृह मंत्रालय ने राज्य में आतंकवाद से निपटने के लिए 16,000 से ज्यादा स्थानिय लोगों को विभिन्न सशस्त्र सेना बलों में भर्ती करने का फैसला लिया है।
फोटो का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से निपटने के लिए केंद्र सरकार एक नई रणनीति बनाने का फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने राज्य में आतंकवाद से निपटने के लिए 16,000 से ज्यादा स्थानिय लोगों को विभिन्न सशस्त्र सेना बलों में भर्ती करने का फैसला लिया है। न्यूज 18 डॉट कॉम के मुताबिक यह जानकारी सामने आ रही है। खबर के मुताबिक लगभग 16,460 स्थानिय लोगों की भर्ती की जाएगी। इन्हीं में से लगभग हजार लोग, सीआरपीएफ की लोकल बटालिया का हिस्सा बनेंगे। स्थानिय लोगों की इस बटालियन को बस्तरिया बटालियन की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। राज्य में दो बटालियन तैयार की जाएंगी। बता दें बस्तरिया बटालियन छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलियों से लड़ने के लिए सीआरपीएफ द्वारा गठित की गई है।

हाल ही में संसद में कश्मीर के हालात सामान्य करने को लेकर सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में सवाल पूछे गए। इसके जवाब में गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने बताया कि राज्य में बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर भर्ती अभियानों को चलाया जाएगा। अहीर ने बताया कि गृह मंत्रालय ने 10 हजार स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (एसपीओ), 5,381 जवान, इंडियन रिजर्स बटालियन (आईआरबी) में और सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में 1,079 जवान भर्ती करने का फैसला लिया है। खबर के मुताबिक एक सीआरपीएफ अफसर ने बताया कि कश्मीर में दो बटालियन बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। बीते साल ही इस विषय पर चर्चा हुई थी।

वहीं सीआरपीएफ की बटालियन को लेकर अफसर ने बताया कि इसमें स्थानीय लोगों के अलावा और राज्यों के लोगों को भी शामिल किया जाएगा। अधिकारी ने बताया कि 1,100 सैनिकों की एक बटालियन बनती है और इनमें लगभग 600 जवान स्थानीय कश्मीरी होंगे, जबकि बाकी के जवान देश के बाकी हिस्सों से भी शामिल होंगे। बता दें इससे पहले सीआरपीएफ द्वारा बस्तरिया बटालियन बनाने के फैसले की कई मानवाधिकार संगठनों द्वारा कड़ी आलोचना की जा चुकी है। संगठनों का आरोप है कि साशन ऐसा करके स्थानीय लोगों को आपस में लड़वाने का काम कर रहा है।

 

 

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